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सोमवार, 26 जनवरी, 2004 को 21:01 GMT तक के समाचार
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तोते ने वैज्ञानिकों को चौंकाया
तोता
मनुष्यों की भाषा की समझ एनकीसी की किसी भी अन्य पशु से अधिक है

तोते से राम-राम, सीताराम या उसका अपना नाम सुनना हमें अकसर रोमांचित करता है मगर अगर वह आपसे चुटीले अंदाज़ में लंबी चौड़ी बातचीत करने लगे तो?

कितना अच्छा होगा वो मौक़ा है न. वैसे ये असंभव नहीं है क्योंकि एक ऐसे पालतू तोते के बारे में पता चला है जिसमें मनुष्यों से बात-चीत करने की अनोखी क्षमता है.

अफ़्रीकी मूल के इस तोते का नाम एनकीसी है.

आश्चर्यजनक रूप से वह लगभग साढ़े नौ सौ शब्द जानता है और इतना ही नहीं माना जा रहा है कि उसमें मज़ाकिया तबियत के लक्षण भी हैं.

इसके अलावा जब उसे लगता है कि उसका शब्द भण्डार कम पड़ रहा है तो वह अकसर नए शब्द और वाक्य भी बना लेता है बिल्कुल एक छोटे बच्चे की तरह.

एनकीसी की शानदार योग्यताओं में टेलीपैथी भी शामिल है और इसका वर्णन बीबीसी की ‘वाइल्ड लाइफ़ मैगज़ीन’ के हाल ही के संस्करण में किया गया है.

माना जा रहा है कि पशुओं के संसार में मनुष्यों की भाषा का ऐसा विकसित प्रयोग करने वाले पशु-पक्षियों में एनकीसी सबसे आगे है.

वह शब्दों का उनके उचित संदर्भ में तो प्रयोग करता ही है साथ ही वह ये प्रयोग भूत, वर्तमान और भविष्य काल में सही तरीक़े से करता है.

जब वह पहली बार चिम्पैंज़ियों की विशेषज्ञ डॉक्टर जेन गुडॉल से मिला और उनकी चिम्पैंज़ियों के साथ खींची गई एक तस्वीर देखी तो बोला, “आपके पास चिम्पैंज़ी है?”

उसे ख़ुद को मज़ाकिया तबियत वाला दिखाना अच्छा भी लगता है.

तोता
एनकीसी ने समझने में रूचि दिखाई है

जब उसने एक तोते को टहनी से उल्टा लटके हुए देखा तो कहने लगा, “इस पक्षी को तो कैमरे पर होना चाहिए.”

डॉक्टर गुडॉल का कहना है कि एनकीसी के बोलने और शब्दों के उच्चारण की क्षमता, “किन्ही दो जातियों में होने वाले संचार का बेहतरीन उदाहरण है.”

एक चित्रकार ने अपने परीक्षण में एनकीसी और उसके मालिक को अलग-अलग कमरों में रखा और उनका फ़िल्मांकन किया.

फिर उस चित्रकार ने तोते के सामने बैठकर कुछ तस्वीरें एक लिफ़ाफ़े में से एक-एक कर निकालनी शुरू कीं.

नतीजा यह निकला कि एनकीसी की सही शब्द बोलने की क्षमता ऐसे मामले में संभव संयोग से तीन गुना अधिक थी.

उदाहरण के तौर पर जब उसने फ़ोन पर बात कर रहे एक व्यक्ति की तस्वीर देखी तो उस चित्रकार से पूछा, “तुम फोन पर क्या कर रहे हो?”.

फिर जब उसने गले मिल रही एक जोड़ी की तस्वीर देखी तो बोला, “क्या मैं तुम्हारे गले लग सकता हूँ?”

यूनिवर्सिटी ऑफ केम्ब्रिज के स्कूल ऑफ वेटेरिनरी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉनल्ड ब्रूम ने कहा, “हम पशु-पक्षियों की पहचानने की शक्ति को जितना देखते हैं वे उतनी ही विकसित लगती हैं. और इस क्षेत्र में तोतों ने सबसे अधिक प्रगति की है.”

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