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चाँद तारों को छूने की आशा
भारत 2007 में चाँद पर अपना पहला यान भेजने की तैयारी में है और राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने भारत भर के वैज्ञानिकों को इस अभियान में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया है. चंड़ीगढ़ में चल रही भारतीय विज्ञान कॉंग्रेस में राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के आधा टन के चंद्रयान को चंद्रमा की कक्षा में भेजने की तैयारी ज़ोर-शोर से जारी है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो को आशा है कि यह चंद्रयान 600 किलो क्लास स्पेस क्राफ़्ट होगा और पोलर सेटेलाइट लॉंच वेहिकल से छोड़ा जाएगा. उन्होंने सभी वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि इसरो के अध्यक्ष जी माधवन नायर ने उनसे इस बारे में एक खास घोषणा करने के लिए कहा है. यदि कोई वैज्ञानिक चाँद पर शोध करना चाहता है या चाँद के पर्यावरण का अध्ययन करना चाहता है तो राष्ट्रपति ने कहा कि वैज्ञानिकों को ऐसा काम करने में पूरा सहयोग दिया जाएगा. पाँच हज़ार लोगों से खचाखच भरे सभागार में राष्ट्रपति ने 2020 तक भारत को विकसित देश बनाने के लिए अपनी योजना भी सामने रखी. कृषि क्षेत्र से लेकर सौर और नाभिकीय उर्जा, कंप्यूटर टेक्नोलोजी, एड्स के लिए टीका और देश की युवा जनसंख्या का समुचित इस्तेमाल का लक्ष्य रखा. उनका कहना था कि ऐसा करने के लिए सही नेतृत्व की भी ज़रूरत है. उसके पहले बच्चों के साथ हुई मुलाक़ात में राष्ट्रपति ने उनके प्रश्नों का जवाब दिया. सवाल विज्ञान के थे और कुछ निजी भी. किसी ने उनसे पूछा कि आप वैज्ञानिक हैं या राष्ट्रपति. जवाब था मैं सबसे पहले शिक्षक था, फिर वैज्ञानिक बना और अब अपनी राष्ट्रपति की भूमिका में भारत को विकसित बनाने के सपने का प्रचार कर रहा हूँ. 2007 में रिटायर होने के बाद शिक्षक बन जाऊँगा. राष्ट्रपति ने बार बार अपना वेबसाइट भी लोगों को याद कराया और कहा कि उनका यह सारी योजना उस पर मौजूद है. पता है http://presidentofindia.nic.in/ |
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