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संक्रामक रोगों पर गहरी चिंता
चंडीगढ़ में आयोजित भारतीय विज्ञान काँग्रेस में एक शोधकर्ता के अनुसार भारत में अधिकतर युवाओं की मौतें उन कारणों से होती हैं जिन्हें दूर किया जा सकता है. शोधकर्ता का कहना था कि भारत में चिकित्सा क्षेत्र के विकास की दिशा में अधिक ध्यान दिया जा रहा है लेकिन आम आदमी की बुनियादी स्वास्थ्य की ज़रूरतों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है.
और यही कारण है कि भारत में लगातार संक्रामक रोग बढ़ते जा रहे हैं जिससे कम उम्र के लोगों की काफ़ी बड़े पैमाने में मौत हो रही है. संक्रामक रोग किसी भी विकसित समाज में मरने वाले लोगों में सबसे अधिक बूढ़े लोग होते हैं और कम उम्र के लोग सबसे कम. राष्ट्रीय विज्ञान काँग्रेस में अपना आलेख पढ़ते हुए डॉ. जैकब जॉन ने कहा," भारत में मरने वाले लोगों की युवाओं की औसत उम्र 22 वर्ष है और उनमें से अधिकतर की मौत संक्रामक रोगों से होती हैं."
क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज तमिलनाडु के सेवानिवृत्त डॉक्टर जैकब जॉन का कहना है कि पश्चिम के देशों में हैज़ा जैसी बीमारियाँ तो बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं से दूर हो जातीं हैं. भारतीय चिकित्सा समाज के लिए ये एक पाठ है. ख़राब चिकित्सा सुविधा चिकित्सकों का मानना है कि भारत में चिकित्सा व्यवस्था की स्थिति काफ़ी ख़राब है और ग़रीब और अमीर के बीच भेदभाव काफ़ी ज़्यादा है. डॉ. जॉन का कहना है कि भारत की सभी संक्रामक बीमारियाँ वो आम बीमारियाँ हैं जो पानी, भोजन, पर्यावरण, मच्छर इत्यादि से फैलतीं हैं और उन पर आसानी से क़ाबू पाया जा सकता है. डॉक्टरों का मानना है कि भारत के बुनियादी स्वास्थ्य केंद्रों के हिस्से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने की ज़िम्मेदारी तो ज़रूर है लेकिन साथ ही नगरपालिका को भी उचित सहयोग करना चाहिए. |
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