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सिंगापुर में साइबर अपराध पर लगाम
सिंगापुर में हैकिंग यानी इंटरनेट के माध्यम से कंप्यूटरों पर हमलों को रोकने के लिए सख़्त क़ानून लाया जा रहा है. देश की संसद ने इस क़ानून को पारित कर दिया है. सरकार का कहना है कि कंप्यूटरों को हैकिंग से होनेवाले नुक़सान से बचाने के लिए नया क़ानून बनाना ज़रूरी था. नए क़ानून के तहत कंप्यूटरों से जुड़ी सारी गतिविधियों पर नज़र रखी जा सकती है और हमले की आशंका से पहले ही कार्रवाई की जा सकती है. आशंका सिंगापुर के कुछ सांसदों ने आशंका जताई है कि नए क़ानून का दुरूपयोग हो सकता है और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को ख़तरा हो सकता है. मगर देश के क़ानून और गृह मंत्री हो पेंग के ने कहा है कि इस क़ानून का इस्तेमाल मुख्यतः राष्ट्रीय सुरक्षा और बैंक तथा वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी आवश्यक सेवाओं को ख़तरे से बचाने के लिए किया जाएगा. उन्होंने कहा,"विस्फोटकों की जगह पर एक आतंकवादी अच्छी तरह तैयार किए गए आँकड़ों को आवश्यक सेवाओं को चलानेवाले कंप्यूटर में पहुँचाकर उतनी ही बड़ी तबाही कर सकता है". क़ानून नए क़ानून के तहत पुलिस किसी हमले से पहले ही कार्रवाई कर सकती है. पकड़े जाने पर 5800 डॉलर के जुर्माने या तीन साल की जेल तक की सज़ा हो सकती है. सिंगापुर में पिछले कुछ वर्षों में साइबर अपराध की घटनाएँ काफ़ी बढ़ी हैं. वर्ष 2000 में ऐसे बस 10 मामले हुआ करते थे मगर पिछले साल इनकी संख्या 41 तक चली गई. पिछले साल पड़ोसी देश इंडोनेशिया के बाली द्वीप में हुए बम हमले के बाद सिंगापुर में सुरक्षा को और चुस्त किया जा रहा है. |
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