|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चेहरा बदलना आसान हुआ
विज्ञान की दुनिया में एक नई क्रांति का संकेत है नया चेहरा लगाना. मतलब यह कि गुर्दे, दिल, आँखों और अन्य अंगों की तरह अब चेहरा भी बदला जा सकेगा. ब्रिटेन के डॉक्टरों का कहना है कि जबसे इस तरह की ख़बरें फैली हैं, कम से कम दस मरीज़ों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई है. फ़्रांस और अमरीका के सर्जनों का कहना है कि वे किसी मरे हुए व्यक्ति का चेहरा ऐसे व्यक्ति के शरीर पर लगा सकते हैं जिसका चेहरा किसी वजह से बिगड़ गया हो. जनसमर्थन ज़रूरी लेकिन ब्रितानी डॉक्टरों का कहना है कि इससे पहले कि वह इस विवादास्पद प्रक्रिया को आगे बढ़ाएँ, उन्हें लोगों का समर्थन चाहिए. किसी मृत व्यक्ति का चेहरा जीवित इंसान को लगाने का ख़याल एक साल पहले प्लास्टिक सर्जनों को आया था. उस समय लंदन के रॉयल फ़्री अस्पताल के एक प्लास्टिक सर्जन पीटर बटलर ने एक सम्मेलन में कहा था कि यह प्रक्रिया कुछ महीने में ही संभव हो जाएगी.
सर्जन कहते हैं कि अब वह ऐसे मुक़ाम पर पहुँच गए हैं जहाँ यह कोई नामुमकिन बात नहीं रही है. उनका कहना है कि कुछ ऐसी दवाइयाँ ईजाद कर ली गई हैं जिनसे यह संभव हो पाया है. इस तकनीक के तहत किसी मरे हुए इंसान के चेहरे की मांसपेशियाँ और त्वचा निकाल कर किसी जीवित व्यक्ति के चेहरे पर लगा दी जाएंगी. सर्जन हालाँकि यह स्वीकार करते हैं कि इस मामले से कई नैतिक और मनोवैज्ञानिक मुद्दे जुड़े हुए हैं. इंगलैंड का रॉयल कॉलेज ऑफ़ सर्जन्स अगले हफ़्ते इस बारे में एक रिपोर्ट प्रकाशित करने जा रहा है और उन्हें उम्मीद है कि इससे एक सार्वजनिक बहस शुरू होने में मदद मिलेगी. रॉयल फ़्री अस्पताल के प्रवक्ता ने ज़ोर दिया है कि जब तक सभी मामलों पर बहस नहीं हो जाती, डॉक्टर इस काम को आगे नहीं बढ़ाएँगे. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||