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हँसी-खुशी की छवि का उल्टा असर
होशियार रहें कहीं हँसी-खुशी की छवि आप में अवसाद न पैदा कर दे. वैज्ञानिकों ने पाया है कि प्रसन्नता और हँसी-खुशी से भरी छवि अवसाद से ग्रस्त लोगों में उल्टी प्रतिक्रिया पैदा कर देती है. शोधकर्ताओं ने ये बात अवसाद से ग्रस्त लोगों के अध्ययन के दौरान पता लगाई. बायलॉजिकल साइकेट्री में प्रकाशित शोधपत्र में वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस खोज से अवसाद के कारणों को समझने में मदद मिली है. अहम खोज साथ ही इससे नई दवाओं के विकास में भी मदद मिलेगी. वैज्ञानिकों ने ब्रिटेन के डार्टफोर्ड स्थित क्लीनिकल न्यूरो साइंस रिसर्च सेंटर में अवसाद से ग्रस्त छह महिलाओं और छह स्वस्थ महिलाओं का अध्ययन किया.
इस अध्ययन में पाया गया कि जो लोग अवसाद से ग्रस्त थे, उन पर इसकी अलग तरह की प्रतिक्रिया हुई. इस दौरान पाया गया कि जो महिलाएँ अवसाद से ग्रस्त थीं, उनमें सकारात्मक तस्वीरों का उल्टा असर हुआ. क्लीनिकल न्यूरो साइंस रिसर्च सेंटर के निदेशक तन्मय शर्मा का कहना था, "इस अध्ययन से महत्वपूर्ण जानकारी मिली है कि क्योंकि अवसादग्रस्त लोगों में मौजूदा दवाइयाँ उतनी प्रभावी साबित नहीं हो पा रही हैं." माना जा रहा है कि इससे नई दवाओं की खोज में मदद मिलेगी. |
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