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क्लोन चूहे से पार्किंसन्स का इलाज
अमरीका में विशेषज्ञों ने क्लोन की गई चूहे के भ्रूण की कोशिकाओं से मानव में पार्किंसन्स जैसी बीमारी के उपचार में सफलता पाई है. इस सफलता के आधार पर वैज्ञानिक अब मानव मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों के इलाज में मदद मिलने की उम्मीद कर रहे हैं. न्यूयॉर्क के मेमोरियल स्लोअन केटरिंग कैंसर सेंटर में हुए इस अनुसंधान की रिपोर्ट नेचर बायोटेक्नोलॉजी पत्रिका में छपी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चूहे के भ्रूण से ली गई स्टेम कोशिकाओं को नए उतकों के रूप में विकसित कर उसका चूहे के मस्तिष्क में प्रतिरोपण किया गया. हालाँकि विशेषज्ञों का मानना है कि मानव पर इस तरह के प्रयोग की राह में कई कठिनाइआँ सामने आ सकती हैं. ऐसा भी नहीं है कि न्यूयॉर्क में हुआ अनुसंधान चूहे की कोशिकाओं के ज़रिए पार्किंसन्स जैसी बीमारियों के उपचार की पहली कोशिश है. नए अनुसंधान की ख़ासियत है ख़ुद मरीज की स्टेम कोशिकाओं का ही उपचार में उपयोग. चमत्कारी स्टेम कोशिकाएँ पाँच दिन के भ्रूण से ली गई स्टेम कोशिकाएँ यों तो अन्य कोशिकाओं जैसी ही होती हैं, लेकिन सही परिस्थितियों में विकसित किए जाने पर इसे शरीर के किसी भी अंग की कोशिका में बदला जा सकता है.
दूसरे शब्दों में कहें तो स्टेम कोशिकाएँ सैद्धांतिक तौर पर शरीर की किसी भी क्षतिग्रस्त उतक का विकल्प उपलब्ध करा सकती हैं. क्लोन भ्रूण के उपयोग का मुख्य लाभ ये है कि इससे ली गई कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त कोशिकाओं का हूबहू विकल्प होती है. इसका मतलब ये हुआ कि मरीज का इसके लिए अलग से उपचार करने की ज़रूरत नहीं होती कि उसका शरीर प्रतिरोपित कोशिकाओं को बिना किसी कठिनाई के स्वीकार कर ले. ताज़ा अनुसंधान में एक चूहे को जानबूझकर इस तरह की परिस्थितियों में पाला गया कि उसमें पार्किंसन्स बीमारी जैसे लक्षण पैदा हो जाएँ. पार्किंसन बीमारी का शिकार कोई व्यक्ति मस्तिष्क की उन कोशिकाओं को गँवा देता है जो कि माँसपेशियों पर नियंत्रण के लिए ज़िम्मेदार होती हैं. बाद में चूहे की पूँछ से ली गई कोशिकाओं के आनुवंशिक तत्वों से भ्रूण का क्लोन बनाया गया. इसके बाद भ्रूण के क्लोन से स्टेम कोशिकाएँ लेकर उसे मस्तिष्क की उन कोशिकाओं के रूप में विकसित किया गया जो कि चूहे में नहीं थीं. विशेषज्ञों ने पाया कि चूहे में मौजूद पार्किंसन जैसे लक्षण ग़ायब हो गए. |
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