
वैज्ञानिक मानते हैं कि मोटापे से दिमागी कमजोरी के पीछे मधुमेह या उच्च रक्तचाप भी कारण हो सकते हैं.
मोटापा सिर्फ आपके शरीर के लिए ही नहीं बल्कि दिमाग के लिए भी नुकसानदेह होता है. हाल ही में किए गए एक शोध में पता चला है कि मोटापे से दिमाग की सोचने-समझने की क्षमता कम हो जाती है.
मोटापे से दिमाग की कमजोरी के कारणों का पता तो वैज्ञानिक अभी तक नहीं लगा पाए हैं, लेकिन वो मानते हैं कि इसके पीछे मधुमेह या उच्च रक्तचाप महत्वपूर्ण कारण हो सकते है.
माना जाता है कि मोटापे से याददाश्त कमजोर हो सकती है.
न्यूरोलॉजी पत्रिका में छपे इस शोध को दस वर्षों में पूरा किया गया जिसमें 6000 ब्रितानी नागरिक शामिल हुए.
शोध में भाग लेने वाले लोगों की उम्र 35 से 55 साल के बीच थी, जिनका दस वर्षों में तीन बार सोचने-समझने का परीक्षण किया गया.
ऐसे लोग जिनके मोटे होने के साथ ही मेटाबॉलिज्म भी असंतुलित था, शोध में उन लोगों के सोचने समझने की क्षमता में गिरावट दूसरे के मुकाबले ज्यादा थी.
डिमेंशिया से अंतर
वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने केवल सोचने-समझने की शक्ति पर शोध किया, भूलने की बीमारी पर नहीं.
"हमें नही पता कि मोटापा और मेटाबॉलिज्म में असंलुतन का वास्ता सोचने-समझने की क्षमता में गिरावट से क्यो हैं, लेकिन इस बारे में और जानकारी जुटाना अहम होगा."
शिर्ले क्रेमर, अलज़ाइमर्स रीसर्च
उम्र के साथ साधारण भूलने की बीमारी, सोचने समझने की क्षमता में कमी और याद्दाश्त भूलने की बीमारी में बहुत कम अंतर होता है. हालांकि ये जरूरी नहीं है कि सभी को भूलने की बीमारी यानी कि डिमेंशिया के दायरे में रखा जाए.
इस शोध में शामिल सभी लोग सार्वजनिक सेवा क्षेत्रों के कर्मचारी हैं, जिसका एक मतलब ये भी हो सकता है कि ये खोज समाज के सभी वर्गों में लागू नहीं होता है.
ब्रिटेन के अलज़ाइमर्स रीसर्च के वैज्ञानिक शर्ले क्रेमर ने कहा, हमें नही पता कि मोटापा और मेटाबॉलिज्म में असंलुतन का वास्ता सोचने-समझने की क्षमता में गिरावट से क्यो हैं, लेकिन इस बारे में और जानकारी जुटाना अहम होगा.
ये शोध केवल सोचने समझने की क्षमता में गिरावट पर केंद्रित है, जबकि इससे पहले हुई कई शोध में पता चला है कि स्वस्थ भोजन, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से परहेज और रक्तचाप नियंत्रण में रखने से डिमेंशिया को दूर रखा जा सकता है.








