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सेहत बनाने वालों को जिम में भारी वज़न उठाना चाहिए या हल्का?
जिम में वज़न उठाने को लेकर सेहत बनाने वाले लोग कई तरह की आशंकाओं से घिर जाते हैं. उन्हें कई बार समझ में नहीं आता कि सही क्या है. वज़न कैसे और कितना उठाना चाहिए.
'स्ट्रेंथ ट्रेनिंग' के बहुत सारे लाभ भी हैं. दूसरे फ़ायदों के अलावा ये संतुलन बनाए रखने के लिए अच्छा है. जोड़ों के दर्द में यह मदद कर सकता है. उम्र बढ़ने के साथ-साथ मांसपेशियों में जो ढीलापन आने लगता है, उसे भी ये कम कर सकता है. वज़न कम करने में भी यह मददगार हो सकता है.
समस्या यह है कि कितना वज़न उठाना चाहिए, इसे लेकर बहुत सारे परस्पर विरोधी सलाह और मशवरे हैं.
पावर लिफ़्टर कभी-कभी कहते हैं, 'भारी उठाओ वर्ना घर जाओ.' जबकि दूसरी सलाह के मुताबिक़ हल्का वज़न उठाने से मांसपेशियों को कसावट और आकार मिलता है. अब सवाल ये है कि हमें भारी वज़न उठाना चाहिए या हल्का?
कनाडा की रिसर्च की सलाह- हल्का वज़न उठाएं
कनाडा की मैकमास्टर यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर स्टुअर्ट फ़िलिप्स के रिसर्च ग्रुप के साल 2016 के एक अध्ययन के मुताबिक़, हल्का वज़न उठाकर आप उतना ही फ़ायदा हासिल कर सकते हैं जितना आप भारी वज़न उठाकर हासिल करना चाहते हैं.
पहले तो यह सलाह थोड़ी समझ से परे लगती है, लेकिन फिर यह सवाल उठता है कि वो इस नतीजे पर कैसे पहुंचे?
शोध के दौरान 49 'वेट ट्रेनर्स' के दो ग्रुप बनाए गए और 12 हफ़्तों का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया. हर एक प्रतिभागी के लिए उन्होंने 'वन-रिपिटीशन मैक्सिमम' या 1RM रखा यानी कि कोई शख़्स कितना भारी वज़न उठा सकता है.
उसके बाद उन्होंने इसे दो समूहों में विभाजित कर दिया. पहला समूह जो अपने RM का 30-50% ही उठाता था. दूसरे समूह ने RM का 75-90% वज़न उठाया. मुख्य बात ये थी कि हर एक समूह ने अपने-अपने वज़न को अपनी पूरी सीमा तक उठाया. दूसरे शब्दों में कहें तो उन्होंने तब तक उठाया जब तक कि उनमें और अधिक वज़न उठाने की ताक़त नहीं बची.
असफलता का सामना किसी को भी करना पड़ सकता है. चाहे वो कितने ही मज़बूत क्यों न हों. हल्का वज़न उठाने वाले समूह ने भारी वज़न वालों की तुलना में 20 से 25 बार भार उठाया. जबकि भारी वज़न वाला समूह ये काम 8 से 12 बार ही कर पाया.
मांसपेशियां क्यों थक जाती हैं?
मांसपेशियों के असफल होने के पीछे 'मोटर यूनिट्स' का अहम किरदार है. 'मोटर यूनिट्स' तंत्रिका द्वारा नियंत्रित मांसपेशी तंतु (मसल फ़ाइबर) के बंडल होते हैं. जब आप वज़न उठाते हैं तो मांसपेशियों को सिकोड़ने के लिए मोटर यूनिट्स की ज़रूरत होगी.
हर बार जब आप वज़न उठाते हैं तो कुछ मांसपेशियां थक जाएंगी. अगली बार वज़न उठाने के लिए ज़्यादा मोटर यूनिट्स की ज़रूरत होगी. जल्द ही आपके पास मौजूद सभी मोटर यूनिट्स थक जाएंगी और यही वजह है कि आपकी मांसपेशियां वज़न नहीं उठा पाएंगी.
मैकमास्टर की स्टडी में जो बात सामने आई वो ये कि अलग-अलग वज़न उठाने के बावजूद दोनों समूहों में ताक़त और मांसपेशियों में वृद्धि बराबर थी.
दूसरे शब्दों में कहा जाए तो कम वज़न अधिक बार उठाने और भारी वज़न कम बार उठा पाने से कोई ख़ास फर्क़ नहीं पड़ता. हाल ही में हुए शोध के निष्कर्ष इसी ग्रुप द्वारा की गई पुरानी स्टडी से मेल खाते थे.
अब सवाल ये है कि हम में से बाक़ी लोगों के लिए इसका क्या मतलब है?
इसका मतलब ये है कि आप भारी वज़न या हल्का वज़न उठाकर भी नतीजे हासिल कर सकते हैं. शर्त ये है कि आप अपनी मांसपेशियों को सामान्य से अधिक काम करने दें.
आपको नतीजे तक पहुंचने के लिए हमेशा तब तक वज़न उठाते रहने की ज़रूरत नहीं है, जब तक आप थक नहीं जाते. ज़रूरत है कि आपकी मांसपेशियों उससे अधिक काम करें जितना वो सामान्य तौर पर दिन भर में करती हैं.
कंफ़र्ट ज़ोन से बाहर आएं
सेंट मेरी यूनिवर्सिटी, ट्विकेनहैम के स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच रिचर्ड ब्लाग्रोव सलाह देते हैं कि एक से 10 के पैमाने पर, जहां 10 बार भार उठाने से मांसपेशियां थक जाती हैं, तो सात से आठ बार इसे दोहराना ठीक रहेगा.
अगर आपकी मांसपेशियां हफ़्ते में एक बार उस 'ओवरलोड' यानी अतिरिक्त भार को महसूस कर रही हैं, तो आपका शरीर उसे स्वीकार कर लेगा और मज़बूत हो जाएगा.
अगर आप चाहते हैं कि मांसपेशियां और मज़बूत होती रहें तो इसके लिए आपको लगातार जितना भार उठाना है और जितनी दफ़ा उसे एक बार में दोहराना है, उसका पुनर्मूल्यांकन करते रहना होगा. ताकि आपकी मांसपेशियों को उस कंफ़र्ट ज़ोन से आगे ले जाया जा सके जिसकी वो कुछ दिनों में आदी हो जाती हैं.
यदि आपको 'वेट ट्रेनिंग' आसान महसूस होता जा रहा है, तो इसका मतलब है उस वेट लिफ्टिंग से बहुत फ़ायदा नहीं हो रहा है.
सबसे ज़रूरी चीज़ ये है कि आपके पास एक सुरक्षित 'वेट प्रोग्राम' होना चाहिए, इसलिए आपको इसे शुरू करने से पहले एक प्रशिक्षित व्यक्ति की आवश्यकता है.
लेकिन जब तक कि आप पॉवर लिफ़्टर या बॉडी बिल्डर नहीं बनना चाहते तब तक कितना अधिक भार उठाना है और उसे कितना दोहराना है वाले चक्कर में न पड़ें.
मांसपेशियों को मज़बूत करने और ताक़तवर बनने के लिए नियमित रूप से जिम जाना और ख़ुद को कंफ़र्ट ज़ोन से बाहर लाना सबसे अधिक ज़रूरी है.
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