कोरोना वायरस: मास्क पहनना अब और ज़रूरी हो जाएगा?

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- Author, डेविड शूकमैन
- पदनाम, साइंस एडिटर
क्या कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को फ़ेस मास्क पहनना चाहिए?
इस सवाल का जवाब अब विश्व स्वास्थ संगठन के कुछ विशेषज्ञ ढूंढेंगे.
विशेषज्ञों का यह समूह अब ये जानने के लिए शोध करेगा कि क्या कोरोना वायरस छींक के ज़रिए 6-8 मीटर से भी ज़्यादा दूरी तक जा सकता है?
अमरीका में हुए एक अध्ययन का कहना है कि कोविड-19 वायरस छींक के ज़रिए 6-8 मीटर की दूरी तक जा सकता है.
इस समूह की अगुवाई करने वाले प्रोफ़ेसर डेविड हेमैन ने बीबीसी से कहा कि नई रिसर्च से मास्क पहनने के निर्देशों और सलाह में बदलाव आ सकता है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के पूर्व निदेशक प्रोफ़ेसर हेमैन ने कहा, "नए साक्ष्यों को देखते हुए हम एक बार फिर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि हमें मास्क पहनने के तरीकों में बदलाव करने की ज़रूरत है या नहीं."

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मौजूदा निर्देश क्या है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ संक्रमण के ख़तरे को रोकने के लिए खांसने या छींकने वाले व्यक्ति से एक मीटर की दूरी बनाकर रखनी चाहिए.
डब्ल्यूएचओ बीमार या कोरोना संक्रमण के लक्षणों वाले व्यक्तियों को मास्क पहनने की सलाह देता है.
फ़िलहाल डब्ल्यूएचओ उन्हीं लोगों को मास्क पहनने की सलाह देता है जिन्हें या तो संक्रमण की आशंका हो या वो संक्रमित लोगों की देखभाल कर रहे हों.
विश्व स्वास्थ्य संगठन इस बात पर भी ज़ोर देता है कि मास्क पहनने का फ़ायदा तभी होगा जब इन्हें थोड़े समय में बदला जाए, ठीक से डिस्पोज़ किया जाए और बार-बार हाथ धोया जाए.
ब्रिटेन और अमरीका समेत कई देश सोशल लोगों को डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करने और एक-दूसरे से कम से कम दो मीटर की दूरी बनाए रखने को कह रहे हैं.
ये सलाह उन साक्ष्यों पर आधारित है जिनमें पाया गया है कि कोरोना वायरस नाक और मुंह के ज़रिए बाहर आने वाली बूंदों के ज़रिए फैलता है.
ऐसा माना जाता है कि संक्रमित व्यक्ति के नाक और मुंह से निकलने वाली ज़्यादातर बूंदें या तो वाष्प बनकर उड़ जाती हैं या ज़मीन पर गिर जाती हैं.



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नई रिसर्च क्या कहती है?
कैंब्रिज में एमआईटी के शोधकर्ताओं ने ये देखने के लिए एक हाई स्पीड कैमरा और अन्य सेंसर इस्तेमाल किया कि असल में किसी के खांसने या छींकने के बाद क्या होता है.
इसमें उन्होंने पाया कि सांस लेने से गैस का एक धुआं पैदा होता है जिसकी गति बहुत तेज़ होती है. इस गैस में कुछ अलग-अलग आकार की कुछ बूंदें भी होती हैं.
इनमें जो सबसे छोटी बूंदें होती हैं वो सबसे ज़्यादा दूर तक जाने की क्षमता रखती हैं.
प्रयोगशाला में किए गए इस अध्ययन से पता चला कि खांसी से निकलने वाली बूदें छह मीटर और आठ मीटर की दूरी तक जा सकती हैं.

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इसके नुक़सान क्या हैं?
इस रिसर्च की अगुवाई करने वाली प्रोफ़ेसर लिडिया बरॉबिया ने बीबीसी को बताया कि वो 'सुरक्षित दूरी' की मौजूदा धारणा को लेकर चिंतित हैं.
उन्होंने कहा, "जब हम सांस लेते, खांसते या छींकते हैं तो ये इससे निकलने वाली बूंदें काफ़ी दूर तक जा सकती हैं. यहां तक कि पूरे कमरे में भी फैल सकती हैं. इसलिए दो मीटर वाली दूरी और ये सोचना कि बूंदें ज़मीन पर गिर जाएंगी, ये बहुत ज़्यादा विश्वसनीय नहीं है. ये धारणा हमने बिना पूरी तरह नापतौल किए और सीधे देखे बनाई है."
इससे मास्क पहनने का तरीका बदलेगा?
प्रोफ़ेसर लिडिया कहती हैं कुछ स्थितियों में जैसे ख़ासकर बंद कमरों में (जहां हवा ठीक से न आती हो) मास्क पहनने से ख़तरा कम होता है.
मिसाल के तौर पर, अगर आप किसी संक्रमित शख़्स के पास हैं तो ऐसे में मास्क उसकी सांस के ज़रिए आने वाले वायरस की दिशा को आपके मुंह के दूसरी तरफ़ मोड़ सकता है.
प्रोफ़ेसर लिडिया के मुताबिक़, "झीने मास्क से पूरी सुरक्षा तो नहीं मिलेगा लेकिन उससे तेज़ गति से आने वाली बूंदों की दिशा कुछ हद तक ज़रूर बदल जाएगी."

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WHO के विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के पूर्व निदेशक प्रोफ़ेसर हेमैन कहते हैं कि एमआईटी की नई रिसर्च का मूल्यांकन किया जाएगा. उन्होंने कहा, "नई रिसर्च से ऐसा लगता है कि मास्क पहनना सोशल डिस्टेंसिंग से कहीं ज़्यादा प्रभावी होगा."
हालांकि वो मास्क को ठीक तरीके से पहने जान पर भी ज़ोर देते हैं.
वो कहते हैं, "मास्क में नाक वाले हिस्से पर एक सील होनी चाहिए क्योंकि अगर वो हिस्सा नम हो गया तो बूंदें अंदर जा सकती हैं. मास्क को उतारने वक़्त भी सावधानी बरतनी होगी ताकि हाथों के संक्रमण न पहुंच जाए. मास्क लगातार पहना जाए."
विश्व स्वास्थ्य संगठन के इस समूह का नाम स्ट्रैटेजिक ऐंड टेक्निकल अडवाइजरी ग्रुप फ़ॉर इंफ़ेक्शियस हैज़र्ड्स है. ये समूह अगले कुछ दिनों में ऑनलाइन मीटिंग करने वाला है.
हालांकि पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के एक प्रवक्ता का कहना है कि इस बात के भी कम सबूत हैं कि घर से बाहर मास्क पहनने के ज़्यादा फ़ायदे हैं.
कोविड-19 संक्रमण के इस दौर में स्वस्थ लोग भी मास्क पहन रहे हैं. ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन की नई रिसर्च मास्क पहनने के आदत को और बढ़ावा दे सकती है.

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