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मायावती यूपीए को समर्थन देंगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी यूपीए को बिना शर्त बाहर से समर्थन देगी. उन्होंने बताया कि इस दिशा में पार्टी के महासचिव सतीश चंद्र मिश्र को सभी 21 सांसदों की सूची के साथ राष्ट्रपति के पास समर्थन पत्र के साथ भेजा जा रहा है. लखनऊ में मायावती ने अपनी पार्टी की चुनाव समीक्षा बैठक से पहले पत्रकारों को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी. मायावती ने मंगलवार को लखनऊ में कहा, "16 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद मैंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी को फ़ोन पर बधाई दी. फ़ोन पर बातचीत के दौरान ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि आप मेरी छोटी बहन हो. मैं आग्रह करता हूं कि देश में धर्मनिरपेक्ष ताकतों को मज़बूत करने के लिए आप सकारात्मक रुख़ अपनाएं." मायावती ने कहा, "हमने राष्ट्रीय कार्यकारिणी और संसदीय समिति से विचारविमर्श किया. हालांकि हमें मालूम है कि यूपीए से उत्तर प्रदेश सरकार को कोई आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद कम है पर देश में तेज़ी से बढ़ रही सांप्रदायिक ताक़तों को कमज़ोर करने के लिए हमारी पार्टी ने यूपीए को बाहर से बिना शर्त समर्थन देने का फैसला लिया है." उधर समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह ने दिल्ली में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को समाजवादी पार्टी की ओर से यूपीए को समर्थन का पत्र सौंप दिया है और साथ ही मायावती के समर्थन के फैसले को राजनीतिक अवसरवाद करार दिया है. समीक्षा बैठक नाराज़ मायावती ने आम चुनाव में पार्टी की हार के लिए अब समीक्षा करने और कड़े क़दम उठाने का मन बनाया है.
मंगलवार को लखनऊ में बुलाई गई इस बैठक में मायावती ने पार्टी के कई पदाधिकारियों के अलावा बसपा के चुनाव चिन्ह पर जीते सांसदों और पार्टी के विधायकों को भी तलब किया है. इस बैठक में पार्टी के आम चुनावों में ख़राब प्रदर्शन से आहत मायावती चुनाव परिणामों और पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा करेंगी. लखनऊ से बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी ने बताया कि नाराज़ मायावती पहले ही लगभग 130 पार्टी नेताओं के इस्तीफे ले चुकी हैं. इन लोगों के पास राज्य की कई समितियों, सरकारी आयोगों और कॉर्पोरेशनों की ज़िम्मेदारियां थीं और वे मंत्रियों के स्तर की सुविधाएं, वेतन पा रहे थे. इन सभी लोगों से पहले से ही तैयार एक इस्तीफे के मसौदे पर हस्ताक्षर करवा लिए गए हैं. इस्तीफे में इन लोगों ने चुनाव में खराब प्रदर्शन की ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ली है. माना जा रहा है कि मायावती इस समीक्षा बैठक के बाद राज्य में प्रशासनिक पदों से लेकर पार्टी और मंत्रिमंडल तक कुछ फेरबदल कर सकती हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें उत्तर प्रदेश में लगा कांग्रेस का 'जैकपॉट'16 मई, 2009 | चुनाव 2009 'दलित की बेटी प्रधानमंत्री बने'25 अप्रैल, 2009 | चुनाव 2009 मायावती सरकार पर बरसे मनमोहन24 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस 'मुझे चुनाव के दौरान जान का ख़तरा है'21 अप्रैल, 2009 | चुनाव 2009 कितना कारगर सर्वजन हिताय का नारा17 अप्रैल, 2009 | चुनाव 2009 मायावती की चुनावी रैली की आँखों देखी12 अप्रैल, 2009 | चुनाव 2009 | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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