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वरुण गांधी साधारण बंदी माने जाएँगे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश सरकार ने वरुण गांधी को राजनीतिक बंदियों की तरह उच्च श्रेणी यानी बी क्लास की सुविधा देने के बजाय साधारण बंदियों की तरह जेल में रखा है, इस कारण वह शारीरिक और मानसिक कष्ट में बताए जाते हैं. एटा जेल में वरुण से मुलाक़ात करने वाले भारतीय जनता पार्टी नेता रमापति राम त्रिपाठी का कहना है "वरुण गांधी को जेल में शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है". उनका कहना था कि वरुण को पीलीभीत जेल में जो खाना दिया गया था वह आदमी के खाने योग्य नही था. इंदिरा गांधी के पोते वरुण गांधी का दिल्ली में पूरे ऐशो-आराम से लालन पालन हुआ ऐसी स्थिति में जेल का उनका पहला अनुभव कैसा हो सकता है यह आसानी से समझा जा सकता है. माँ ही माँ का दर्द समझ सकती है बरेली में वरुण गांधी की मां मेनका गांधी ने एटा पुलिस अधिकारी का हवाला देते कहा कि उन्हें वरूण से सात तारीख़ से पहले मिलने नहीं दिया जाएगा.
उन्होंने मायावती की ओर इशारा करते हुए ये भी कहा कि एक माँ ही माँ का दर्द समझ सकती है. मेनका के गांधी परिवार से संबंधों पर नज़र डालने से पता चलता है कि वरुण से उनका कितना लगाव रहा होगा. वहीं जेल आधिकारियों का कहाना है कि जेल नियमों के मुताबिक़ किसी बंदी से सप्ताह में केवल दो बार मुलाक़ात हो सकती है. इसी नियम का हवाला देते हुए ज़िला मजिस्ट्रेट एटा ने आज वरुण की माँ मेनका गांधी को उनसे मुलाक़ात की अनुमति नही दी. इससे पहले मेनका और भाजपा के अन्य नेता वरुण से बारी बारी दो दिन मिल चुके हैं. नियमों का पालन मुख्यमंत्री मायावती के दौर में वरुण गाँधी के मामले में जेल अधिकारी कड़ाई से नियमों का पालन कर रहे हैं. सामान्य तौर पर रासुका लगाने वाला डीएम ही बंदी की सामाजिक और शैक्षणिक स्थिति को देखते हुए उच्च श्रेणी की सुविधा देने का आदेश साथ ही साथ दे देते हैं. जेल नियमों के अनुसार आईजी जेल भी यह आदेश दे सकते हैं. पर वरुण के मामले में कोई अधिकारी पहल करने का जोखिम नही ले सकता. वरुण के प्रार्थनापत्र पर सीजेएम पीलीभीत ने वरुण को घर का खाना देने की अनुमति दी थी, जिसके लिए तीन लोग नामित हैं और जेल अधिकारी केवल उन्ही से वरुण के लिए खाना ले सकते हैं. सुविधाएँ पीलीभीत जेल में वरुण को अस्पताल में रख दिया गया था, जहां बेहतर सुविधा होती है, पर उन्हें मच्छरों ने परेशान किया और जेल कर्मचारी नियमों का हवाला देकर बत्ती नही बुझाते थे, जिससे नींद में दिक्कत आती थी. पहली रात तो वह बमुश्किल सोए. रात भर पानी पीते रहे और बार बार पेशाब जाते रहे. एटा में जेल के डाक्टर ने वरुण को शारिक रूप से बिलकुल फिट बताया है, इसलिए उन्हें अस्पताल के बजाय एक कोठरी में अकेले रखा गया है. बिस्तर ज़मीन पर है. दरी, चादर और कंबल दिया गया है. समय काटने के लिए वरुण ने जेल पुस्तकालय से वाल्मीकि रामायण और गीता ली है. उनकी चचेरी बहन प्रियंका गांधी ने भी उन्हें भगवतगीता ठीक से पढ़ने की सलाह दी थी क्योंकि वरुण ने मुसलामानों के ख़िलाफ़ अपने कड़वे भाषण में गीता का ज़िक्र किया था. भाजपा नेता रमापति त्रिपाठी के मुताबिक़ वरुण का वज़न एक दो किलो कम हो गया है, वह थके और कमज़ोर लग रहे थे, लेकिन उनका मनोबल ऊंचा है और वह लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं. भाजपा के एक नेता के मुताबिक वरुण विचारों से पक्के हिन्दुत्ववादी हैं, वह पूजा करते हैं और हनुमान जी के ख़ास भक्त हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें वरुण पीलीभीत से एटा जेल भेजे गए 01 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस नफ़रत की राजनीति दूर तक नहीं जाती...01 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस वरुण गाँधी के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून29 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस वरुण की याचिका हाईकोर्ट में ख़ारिज25 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस वरुण ने हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया19 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस वरुण की रैलियों की रिकार्डिंग का आदेश18 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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