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विद्रोहियों के इलाक़े में दवाइयाँ भेजी गईं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका में अधिकारियों के अनुसार रेडक्रॉस संस्था के सहयोग से लड़ाई वाले उत्तरी इलाक़े में ज़रूरी दवाइयों की खेप पहुँचाई गई है. मुलईतिवु ज़िले में पुत्थुमतालान स्थित जिस अस्थाई अस्पताल तक ये खेप पहुँचाई गई है, वो तमिल छापामारों के नियंत्रण वाले इलाक़े में मौजूद एकमात्र स्वास्थ्य केंद्र है. अस्पताल के डॉक्टरों ने चेतावनी दी थी कि तत्काल सहायता नहीं पहुँचाई गई तो अस्पताल को बंद करना पड़ सकता है. यदि ऐसा होता तो लड़ाई की चपेट में आकर घायल होने वाले सैंकड़ो लोग भगवान भरोसे रह जाते. रविवार को इलाक़े के वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वरदराजा ने इस बात की पुष्टि की है कि सरकार द्वारा भेजी गई दवाइयाँ अस्पताल तक पहुँच चुकी हैं. इस कारण अब कम-से-कम दो हफ़्तों तक अस्पताल का कामकाज़ बिना किसी व्यवधान के चल सकता है. रेडक्रॉस का सहयोग दवाइयों की ये खेप सरकार ने रेडक्रॉस संस्था की सहायता से भेजी है. इनमें बच्चों के टीकों समेत 50 से ज़्यादा ज़रूरी दवाइयाँ शामिल हैं. उल्लेखनीय है कि एक पखवाड़े में पहली बार विद्रोहियों के नियंत्रण वाले इलाक़े में कोई चिकित्सा सामग्री पहुँची है. हालाँकि डॉ. वरदराजा ने इस बात पर असंतोष व्यक्त किया कि एनेस्थेटिक दवाएँ और रक्त के थैले उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जिसके चलते ऑपरेशन के काम को जारी रखना मुश्किल होगा. इस बीच रक्षा मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि पिछले कुछ दिनों में एक हज़ार से ज़्यादा की संख्या में आम नागरिक लड़ाई वाले इलाक़े से भाग कर बाहर आए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें श्रीलंका में सैकड़ों बच्चे मारे गए: यूनिसेफ़18 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस उत्तर-पूर्वी श्रीलंका में भीषण संघर्ष जारी17 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस तमिल इलाक़े में दवाइयों की कमी14 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस तमिल विद्रोहियों को मारने का दावा14 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस यूएन को श्रीलंका में युद्धापराध की आशंका13 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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