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श्रीलंका के मुद्दे पर जयललिता का अनशन | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंकाई तमिलों के साथ हमदर्दी दिखाने के लिए तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता चेन्नई में एक दिन का अनशन पर हैं. ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) की नेता जयललिता ने भारत सरकार और राज्य की करुणानिधि सरकार पर आरोप लगाया है कि उन्हें लड़ाई में फँसे श्रीलंकाई तमिलों की कोई चिंता नहीं है. उन्होंने अनशन पर बैठने के बाद कहा, "यूपीए सरकार तुरंत वहाँ मानवीय सहायता भेजने में विफल रही. सरकार वहाँ खाने की चीज़ें, दवाइयाँ और कपड़े क्यों नहीं भेज सकती? केंद्र और राज्य सरकार दोनों को तमिलों की चिंता नहीं है." जयललिता चाहती हैं कि केंद्र सरकार तमिल विद्रोहियों और श्रीलंकाई सेना के बीच संघर्ष विराम घोषित कराने की कोशिश करे. उन्होंने कहा कि उनके अनशन से पीड़ित तमिलों को भले ही कोई राहत ना पहुँचे लेकिन ये संदेश ज़रूर जाएगा कि तमिलनाडु के लोगों में इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार से कितनी नाराज़गी है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वो श्रीलंकाई तमिलों के लिए चंदा इकट्ठा करेंगी. उन्होंने ख़ुद पाँच लाख रुपए देने की घोषणा की. एआईएडीएमके नेता ने राज्य में सत्तारुढ़ डीएमके और कांग्रेस के बीच गठबंधन को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि आने वाले चुनाव में जनता इन्हें नकार देगी. | इससे जुड़ी ख़बरें पूर्वोत्तर श्रीलंका में लड़ाई तेज़ हुई08 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस रेडक्रॉस ने 'मानवीय संकट' की चेतावनी दी04 मार्च, 2009 | भारत और पड़ोस 'संघर्ष विराम को तैयार' तमिल विद्रोही23 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस जयललिता ने कांग्रेस की ओर बढ़ाया हाथ20 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो: यूएन19 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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