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स्तब्ध रह गए प्रत्यक्षदर्शी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लाहौर में श्रीलंकाई क्रिकेट खिलाड़ियों पर हुए चरमपंथी हमलों के प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि वे हमलावरों का दुस्साहस देखकर स्तब्ध रह गए. अंपायर खिलाड़ियों की बस के पीछे वाली बस में थे और उन्होंने गोलियों की आवाज़ें सुनीं. इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी पाकिस्तानी अंपायर नदीम ग़ौरी ने समाचार एजेंसी एपी को बताया, "गोलीबारी सुबह 8.40 पर शुरु हुई और 15 मिनट तक चलती रही. हमारे ड्राइवर को गोली लगी और वह घायल हो गया." श्रीलंकाई क्रिकेट खिलाड़ी महेला जयवर्धने ने क्रिकइंफ़ो को बताया की बस पर हमला तब हुआ, जब वे स्टेडियम पहुँच ही रहे थे. उन्होंने बताया, "बंदूकधारियों ने पहले बस के पहियों को निशाना बनाया फिर बस पर गोलियाँ बरसानी शुरु कीं." उनका कहना था, "हम सब कूद कर बस के फ़र्श पर लेट गए ताकि हम आड़ में रहें. पाँच खिलाड़ी और सहायक कोच पॉल फ़ारब्रेस घायल हुए हैं. किसी को भी ज़्यादा चोट नहीं आई है क्योंकि ज़्यादातर लोग मलबे की वजह से घायल हुए." इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर डोमिनिक कॉर्क इस मैच के लिए कमेंट्री कर रहे थे. उनका कहना है कि जब वे गद्दाफ़ी स्टेडियम पहुँचे तो उन्होंने गोलियों की तेज़ आवाज़ें सुनीं. उनका कहना है कि वे यह देखने के लिए भागकर कमेंट्री बॉक्स तक गए कि क्या हो रहा है. उन्होंने बताया, "श्रीलंकाई टीम की बस पहुँची तो उस पर हर ओर गोलियों के निशान थे. स्वाभाविक तौर पर लोगों के चीख़ने की आवाज़ आ रही थी और मेडिकल टीम के सदस्य चिल्ला रहे थे. मैं देख पा रहा था कि टीम के कम से कम छह सदस्य घायल हो गए हैं." उनका कहना था कि खिलाड़ियों ने उन्हें बताया कि एक चौराहे पर जब बंदूकधारियों ने गोलियाँ बरसानी शुरु कीं तो उनके ड्राइवर की वहीं मौत हो गई. उन्होंने याद किया, "वे सब बस के फ़र्श पर लेटे हुए थे और किरचें इधर-उधर उड़ रही थीं. एक खिलाड़ी ने बाद में बताया कि उसने सोचा, अब तो सब ख़त्म, मैं तो मर जाउँगा." चूंकि ड्राइवर घटनास्थल पर ही मारा गया था, एक यात्री ने पुलिस से अनुरोध किया कि वे बस चलाकर उन्हें क्रिकेट मैदान तक पहुँचा दें. केमेंटेटर कॉर्क का कहना था, "वे शारीरिक रुप से तो ठीक दिखाई दे रहे थे, लेकिन उनको देखकर कोई भी कह सकता था कि वे भीतर से हिल गए हैं. मैंने अब तक किसी को ऐसे सदमे और हताशा में नहीं देखा था." उन्होंने कहा, "इसके बाद तो लंबे समय के लिए पाकिस्तान में तो क्रिकेट ख़त्म हो गया, हो सकता है कि बाक़ी एशिया में भी." 'शब्द नहीं' लाहौर निवासी अहमद हसन ने बीबीसी को बताया कि चूंकि स्टेडियम के आसपास सुरक्षा इंतज़ाम की वजह से पुलिस ने रास्ते रोक दिए थे इसलिए वे ट्रैफ़िक जाम में फँसे हुए थे. उनका कहना था कि 10-15 मिनट तक लगातार गोलियाँ चलती रहीं और बीच में दो बार धमाकों की भी आवाज़ सुनाई पड़ी. उनका कहना है कि इसके बाद वे अपनी कार छोड़कर छिपने की जगह ढूँढ़ने के लिए भाग गए. उन्होंने कहा, "मुझे लगा कि मैं भी गोली का शिकार हो सकता हूँ. यह मेरे जीवन का सबसे बुरा दिन था." बाद में खिलाड़ियों को सेना के हेलीकॉप्टर के ज़रिए स्टेडियम से बाहर निकाला गया. श्रीलंकाई रेडियो स्टेशन यस-एफ़एम से बात करते हुए श्रीलंकाई टीम के कुमार संगकारा ने कहा कि संतोष की बात है कि सभी खिलाड़ी ख़तरे से बाहर हैं. |
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