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गुजरात में डॉक्टरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुजरात के साबरकंठा ज़िले में फैले हेपेटाइटिस बी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है. इस बीच इस मामले में पाँच डॉक्टरों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज किया गया है. राज्य सरकार इन डॉक्टरों को हेपेटाइटिस बी फैलने का ज़िम्मेदार मान रही है. सरकार का कहना है कि इन डॉक्टरों ने सिरिंज का दोबारा इस्तेमाल किया. इतना ही नहीं स्वास्थ्य अधिकारियों ने शुक्रवार से इलाक़े के 16 मेडिकल स्टोर को भी सील कर दिया है. गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री जय नारायण व्यास ने इन आरोपों से इनकार किया है कि इस मामले से निपटने के लिए ज़रूरी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है. 'नज़र' उन्होंने कहा, "इसका सवाल ही नहीं उठता. ऐसा बिल्कुल नहीं है कि ज़रूरी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है." उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार की स्थिति पर नज़र है. हेपेटाइटिस बी के कारण सात और लोगों की मौत हो गई. ज़िलाधिकारी एम थेनेरासन ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "साबरकंठा ज़िले में सात लोगों की मौत हुई है. मारे गए ज़्यादातर लोग मोडासा तालुका के थे. 23 अन्य लोगों को अस्पताल में जाँच के लिए भर्ती कराया गया है." इस बीच धनसुरा और मोडासा से दो डॉक्टरों को शुक्रवार को गिरफ़्तार कर लिया गया है. इन दोनों के ख़िलाफ़ भी एफ़आईआई दर्ज हुआ था. | इससे जुड़ी ख़बरें गुजरात में हेपेटाइटिस से मौतों की जाँच20 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस एशियाई हेपेटाइटिस-सी के ख़तरे में03 सितंबर, 2005 | विज्ञान भारी पड़ सकता है चुंबन 29 सितंबर, 2003 | विज्ञान हेपेटाइटिस बी का नया इलाज12 मई, 2003 | विज्ञान गोदना गुदवाने से पहले...18 जुलाई, 2003 | विज्ञान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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