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क्या अमरीकी बंदूकें तालेबान के पास? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कहीं अमरीका से अफ़ग़ानिस्तान में तैनात सुरक्षाबलों के लिए भेजे जा रहे हज़ारों हथियार उन्हीं तालेबान लड़ाकों के हाथ तो नहीं पड़ रहे जिनके ख़िलाफ़ इस्तेमाल के लिए उन्हें भेजा जा रहा है... जी हाँ, अमरीका की सरकार की ताज़ा चिंता इसी बात को लेकर है. अमरीकी सरकार की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे कई हज़ार हथियारों का कोई हिसाब उनके पास नहीं है जिन्हें अफ़ग़ानिस्तान में तालेबान चरमपंथियों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल होने के लिए भेजा गया था. चिंता की बड़ी वजह यह आशंका है कि कहीं ये हथियार तालेबान लड़ाकों का हाथ में तो नहीं पहुँच गए हैं या अगर नहीं, तो कहीं पहुँच न जाएं. ये हथियार अमरीका से अफ़ग़ानिस्तान में चरमपंथियों का मुक़ाबला कर रही नैटो गठबंधन सेना के लिए भेजे गए थे. हाल ही में अमरीका सरकार के लेखा-जोखा एवं जवाबदेही विभाग की ओर से एक अध्ययन करके रिपोर्ट तैयार की गई है जिसमें यह चिंता व्यक्त की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक हथियारों के इन जखीरों में पिस्तौलें, राइफ़लें, मशीनगनें, मोर्टार, रॉकेट और ग्रेनेड लॉन्चर जैसे हथियार शामिल हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि न तो अफ़ग़ानिस्तान भेजे गए हथियारों के नंबर ही सरकार के या किसी आला अधिकारी के पास हैं और न हीं यह पता चल पा रहा है कि किस इलाके में कितने हथियार किसे दिए गए हैं. इससे हथियारों के चोरी होने या खो जाने का खतरा भी बना हुआ है. | इससे जुड़ी ख़बरें काबुल में तीन हमलों में 19 मारे गए11 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस 'इराक़ से भी कठिन है अफ़ग़ानिस्तान'08 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस आत्मघाती हमले में 21 पुलिसकर्मी मरे02 फ़रवरी, 2009 | भारत और पड़ोस हमलों का उलटा असर होता है: पाकिस्तान28 जनवरी, 2009 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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