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श्रीलंका: बीबीसी ने करार ख़त्म किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने कहा है कि वो श्रीलंका प्रसारण बोर्ड( एसएलबीसी) को रेडियो समाचार देना फ़िलहाल बंद कर रही है. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस का कहना है कि समाचारों में जानबूझ कर दखलअंदाज़ी की जा रही है. वर्तमान में एसएलबीसी बीबीसी के समाचारों को एफ़एम पर अंग्रेज़ी, तमिल और सिंहला में प्रसारित करती है. बीबीसी के मुताबिक वो एसएलबीसी के साथ पुन: प्रसारण का करार मंगलवार को ख़त्म कर देगी क्योंकि कई बार ऐसा हुआ है कि बीबीसी के समाचारों को सेंसर किया गया. बीबीसी शॉर्टवेव पर तीनों भाषाओं में प्रसारण जारी रखेगी और ये सेवा ऑनलाइन भी उपलब्ध होगी. अंग्रेज़ी में बीबीसी की ख़बरें श्रीलंका के व्यावसायिक रेडियो प्रसारक एमबीसी पर आती रहेंगी. मीडिया श्रीलंका में विभिन्न पत्रकारों पर कई बार हमले भी हुए हैं. जनवरी में ही 'संडे लीडर' के संपादक लासांता विक्रमतुंगा को मोटरसाइकिल पर सवार अज्ञात लोगों ने उस समय गोली मार दी थी जब वे कार्यालय की ओर आ रहे थे. तमिल विद्रोहियों और श्रीलंका सरकार के बीच पिछले दिनों भीषण संघर्ष चला था. उस दौरान भी श्रीलंका सरकार ने मीडिया को चेतावनी देते हुए कहा था कि वो ऐसे कूटनयिकों, राहत एजेंसियों और पत्रकारों को देश से बाहर निकाल देगी जो तमिल विद्रोहियों के पक्ष में नज़र आ रहे हैं. इसमें बीबीसी का नाम भी था. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ने 2007 में अपने 75 साल पूरे किए थे.वर्ष 1932 में लंदन से बाहर की पहली प्रसारण सेवा ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के लिए शुरू की गई थी. उस समय इसे एंपायर सर्विस के नाम से जाना जाता था. ब्रिटिश शासन के दूरदराज़ के हिस्सों से संपर्क साधने के लिए इस रेडियो सेवा का इस्तेमाल किया जाता था. | इससे जुड़ी ख़बरें 'सहायता संगठनों पर भरोसा करे बीबीसी'26 जनवरी, 2009 | पहला पन्ना गज़ा अपील प्रसारित नहीं करने पर विवाद26 जनवरी, 2009 | पहला पन्ना बीबीसी ने फ़ारसी टीवी चैनल शुरू किया14 जनवरी, 2009 | पहला पन्ना परमाणु हमले के बाद ऐसा होता संदेश03 अक्तूबर, 2008 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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