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'वज़नी' विमान परिचारिकाएँ बर्ख़ास्त | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की सरकारी एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया ने उन विमान परिचारिकाओं को बर्ख़ास्त कर दिया है जिन्हें दो साल पहले 'ओवरवेट' पाया गया था. ज़्यादा वज़नी पाए जाने के बाद कंपनी ने नौ परिचारिकाओं को 'ग्राउंड ड्यूटी' पर भेज दिया था. लेकिन अब उन्हें कहा गया है कि हवाई अड्डे पर उनकी ज़रूरत नहीं रह गई है. विमान परिचारिकाओं के वकील ने बीबीसी से कहा है कि वो सुप्रीम कोर्ट में इस फ़ैसले को चुनौती देंगे. पिछले साल जून में दिल्ली हाईकोर्ट इंडियन एयरलाइंस की उन एयर होस्टेस की याचिका ख़ारिज कर दी थी जिन्हें ओवरवेट यानी वज़न अधिक होने की वजह से ग्राउंड ड्यूटी पर भेज दिया गया था. हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि सरकारी एयरलाइन को भी बढ़ती प्रतिस्पर्धा से निपटने और यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर क़दम उठाने का अधिकार है. विमान परिचारिकाओं ने इस फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी जहाँ मामला अभी लंबित है. 'विमान सेवा के लायक नहीं' एयर इंडिया के प्रवक्ता जीतेंद्र भार्गव ने बीबीसी को बताया कि ये एयर होस्टेस चिकित्सा मानकों पर खड़ी नहीं उतरीं, इसलिए ये फ़ैसला किया गया है. उनका कहना था, "वे दो से तीन वर्षों से होस्टेस की भूमिका नहीं निभा रही हैं क्योंकि उनका वज़न बहुत ही ज़्यादा है." जीतेंद्र भार्गव के मुताबिक इनका वज़न तय मानकों से 11 से 32 किलोग्राम ज़्यादा है और वज़न कम करने के सारे प्रयास विफल हो गए. एयर इंडिया की एक होस्टेस शीला जोशी ने बताया कि उनकी नौ सहयोगियों को पिछले तीन-चार दिनों में नौकरी से निकाले जाने की चिट्ठी मिली है. | इससे जुड़ी ख़बरें ऊँची उड़ान के लिए ऊँची जाति ज़रूरी नहीं05 मई, 2008 | भारत और पड़ोस उड़ने के लिए 'हल्का होना ज़रूरी'01 जून, 2007 | भारत और पड़ोस एयर होस्टेस बनेंगी आदिवासी लड़कियाँ22 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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