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मंगलवार, 25 नवंबर, 2008 को 08:50 GMT तक के समाचार
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मैं ऐसी ही हूं-शीला दीक्षित

शीला दीक्षित
शीला दीक्षित पिछले दस साल से दिल्ली की मुख्यमंत्री हैं

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित दिल्ली की जनता के बीच अपनी साफ़ सुथरी दादी मां जैसी छवि का राज़ नहीं खोलना चाहती हैं और बस इतना कहती हैं कि वो ऐसी ही हैं.

दिल्ली विधानसभा चुनावों से पहले प्रचार में जुटी मुख्यमंत्री ने बीबीसी के साथ विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत बातचीत की.

आप किन मुद्दों पर चुनाव लड़ रही हैं?
हम विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं. पिछले दस साल में दिल्ली में जितना काम हुआ है उतना कभी नहीं हुआ. आधारभूत ढांचे में, सामाजिक स्तर पर और आर्थिक स्तर पर दिल्ली आगे बढ़ी है. सड़कें, मेट्रो, फ्लाईओवर आप देखिए दिल्ली की काया बदल गई है. हमने लड़कियों के लिए कई योजनाएं बनाईं. अर्थव्यवस्था के स्तर पर जहां पूरे देश में मुद्रा स्फीति की दर 12.5 प्रतिशत थी हमने दिल्ली में इसे पांच प्रतिशत पर रखा. रोज़गार के अवसर बढ़ाए.

आपके लिए एक कोई बड़ा मुद्दा.
विकास, विकास चहुंमुंखी विकास. हमने हर क्षेत्र में काम करने की पूरी कोशिश की.

मंहगाई एक बड़ा मुद्दा बन कर उभरा है. आप मंहगे प्याज़ के मुद्दे पर जीत कर आईं थी.
मंहगाई हमारे नियंत्रण में नहीं है ये बात आम जनता जानती है और समझती है. बीजेपी कह रही थी कि टमाटर मंहगे हैं लेकिन लोग जानते हैं कि इस मौसम में टमाटर मंहगा होता है और अब तो उसकी क़ीमत भी कम हो गई है. बीजेपी अपने राज्यों में मध्य प्रदेश राजस्थान में कहते हैं कि मंहगाई तो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है फिर दिल्ली में भी यही बात है. इसके बावजूद मैंने गैस की क़ीमतें कम कीं और जहां जो संभव हुआ वो किया है.

देश की राजधानी दिल्ली में महिलाओं को क्या और सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए.
मैं इस बात से परेशान हूं और चिंतित भी हूं. लेकिन मैं बार बार कहती रही हूं कि दिल्ली की क़ानून और व्यवस्था केंद्र के हाथ में होती है और राष्ट्रीय चुनावों में ये बात ज़रुर उठेगी. हालांकि फिर भी अपने स्तर पर कोशिश करती हूं कि सुरक्षा का एक अच्छा माहौल बन सके.

लोगों से मिलती शीला दीक्षित
शीला दीक्षित अपने घर पर हर दिन की लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनती हैं

आपकी छवि को लेकर कई बातें होती रहती हैं. आप लोगों को अपने परिवार की सदस्य जैसी लगती है लेकिन बीजेपी कहती है कि आप मीडिया को मैनेज़ करती हैं.
आप बताइए ( हंसते हुए) क्या मैंने आपको मैनेज किया. मीडिया को कोई कैसे मैनेज कर सकता है. अगर कोई किसी के बारे में अच्छा लिख दे ये कहना कि मैंने उसको पैसे दिए बिल्कुल ग़लत बात है. मीडिया स्वतंत्र है आलोचना करने के लिए. मैंने कभी किसी को नहीं रोका आलोचना करने से.

लेकिन दस साल मुख्यमंत्री रहने के बावजूद आपकी छवि इतनी अच्छी कैसे है. क्या राज़ है इसका.
मैं आपको ये राज़ नहीं बताऊंगी. हंसते हुए.... असल में मैं ऐसी ही हूं. मैं अपने जीवन में जैसी हूं वैसे ही आम जनता के साथ भी व्यवहार करती हूं. उनसे बात करती हूं तो लोगों को लगता है कि वो मेरे पास आ सकते हैं अपनी बात कह सकते हैं.

बहुजन समाज पार्टी की कितनी बड़ी भूमिका रहेगी न चुनावों में. बीजेपी कहती है कि वो कांग्रेस के वोट काटेगी.

बसपा से हम डरे हुए थे लेकिन अब देखिए उनकी कोई योजना नहीं है. कोई प्लान नहीं है. मायावती जी अपनी रैली में कहती हैं कि संसद के लिए उन्हें वोट करें. दिल्ली सरकार की उन्हें चिंता नहीं है. बीजेपी ये बात बार बार उछाल रही है क्योंकि उसे लगता है कि इससे कांग्रेस का मनोबल गिरेगा. ऐसा बिल्कुल नहीं है और बसपा कोई बड़ी भूमिका नहीं निभा रही है.

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