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'अभियुक्तों को अपनों से मिलने दिया जाए' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली बम धमाकों के सिलसिले में गिरफ़्तार किए गए अभियुक्तों को उनके रिश्तोदारों और वकीलों से मिलने दिए जाने के निर्देश जारी किए हैं. तेरह सितंबर को दिल्ली में सिलसिलेवार पाँच बम धमाके हुए थे जिनमें 22 लोग मारे गए थे. अदालत ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस से कहा कि सभी अभियुक्तों को वो तमाम अधिकार दिए जाएँ जो एक अभियुक्त को भारत का संविधान देता है. जनहित याचिका पर निर्देश उच्च न्यायालय की दो जजों की एक पीठ ने शुक्रवार को ये निर्देश एक जनहित याचिका की अपील पर दिया है. याचिकाकर्त्ताओं ने आरोप लगाया गया था कि दिल्ली बम धमाकों के सिलसिले में गिरफ़्तार किए लोगो को उनके वकीलों और रिश्तेदारों से मिलने नहीं दिया जा रहा है.
याचिकाकर्त्ताओं का तर्क था कि किसी अभियुक्त को उनके वकीलों और रिश्तेदारों से न मिलने दिया जाना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है. ये जनहित याचिका एक ग़ैर सरकारी मानवाधिकार संस्था पीपुल्स यूनियन फ़ॉर डिमोक्रेटिक राइट्स ने दायर की थी. दूसरे मामले पर भी लागू अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि ज़िया-उर-रहमान और साक़िब निसार को शुक्रवार की शाम ही उनके रिश्तेदारों और वकीलों से मिलने दिया जाए. कोर्ट का कहना था कि ऐसी व्यवस्था गिरफ़्तार किए गए दूसरे लोगों के मामले में भी की जाए, यदि वे इसकी प्रार्थना करें. इस मामले की सुनवाई 15 अक्तूबर को होनी है. रहमान और निसार को दिल्ली पुलिस ने जामिया नगर में हुई पुलिस मुठभेड़ के बाद 20 सितंबर को गिरफ़्तार किया था. इस मुठभेड़ में दो संदिग्धों सहित दिल्ली पुलिस के एक इंस्पेक्टर भी मारे गए थे. |
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