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'धुँए के बीच लोगों को नीचे पड़े देखा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली में हुए पाँच विस्फोट हुए हैं. इनमें में से एक करोल बाग के गफ़्फ़ार मार्केट में, एक कनॉट प्लेस में, एक बाराखंबा रोड में और दो ग्रेटर कैलाश में हुए हैं. बीबीसी संवाददाताओं ने विस्फोट के बाद वहाँ पहुँचकर कुछ प्रत्यक्षदर्शियों से बात की और जानना चाहा कि विस्फोट कैसे हुए और उसके बाद वहाँ कैसा माहौल था. करोल बाग के गफ़्फ़ार मार्केट में हुए विस्फोट स्थल से बीबीसी संवाददाता समीर आत्मज मिश्र को एक प्रत्यक्षदर्शी दर्शनलाल ने बताया कि वहाँ धमाकों के बाद कैसा भयावह मंज़र था. उन्होंने बताया, "जब धमाका हुआ तो मैं वहाँ से मुश्किल से 20-25 गज दूर था. जब वहाँ से ज़ोरदार धमाके की आवाज़ आई तो मैं उधर भागा." उनका कहना था, "वहाँ धुँआ उठ रहा था और एक ऑटो रिक्शा टूटा-फूटा पड़ा था, एक कार क्षतिग्रस्त हो गई थी और एक रिक्शेवाला वहाँ पड़ा हुआ था." दर्शनलाल ने बताया कि धुँए के बीच से उन्होंने देखा कि एक पेड़ के नीचे चार पाँच लोग नीचे गिरे हुए हैं, वही पास की एक गली के पास कुछ लोग नीचे पड़े हुए थे. उनका कहना था, "मैंने कुल 15-16 लोगों को सड़क पर पड़े हुए देखा और फिर हमें इससे आगे नहीं जाने दिया गया." विस्फोट के तुरंत बाद बाराखंभा रोड पर पहुँची बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह को एक प्रत्यक्षदर्शी अमित ने बताया कि उन्होंने तेज़ आवाज़ सुनी तो पहले तो उन्हें लगा कि किसी बस का टायर फट गया है. लेकिन इसके बाद उन्होंने धुँआ उठता हुआ देखा और कुछ लोग घायल पड़े हुए दिखाई पड़े जिसमें एक महिला भी थी. उन्होंने दो बसें भी वहाँ खड़ी हुई देखीं और तब उन्हें पता चला कि विस्फोट हुआ है और तब तक वहाँ अफरातफ़री मच चुकी थी. कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में एक प्रत्यक्षदर्शी चंचल ने बीबीसी संवाददाता मोहन लाल को बताया, "विस्फोट के बाद यहाँ लोग घायल पड़े हुए थे और उनका शरीर ख़ून से लथपथ था." चंचल के ख़ुद के कपड़े ख़ून से सने हुए थे और उन्होंने बताया, "मैंने चार लोगों को उठाकर अस्पताल पहुँचाया है." ग्रेटर कैलाश पार्ट वन के एम ब्लॉक मार्केट पहुँचे बीबीसी संवाददाता पाणिनी आनंद ने वहाँ के एक दुकानदार रमेश से बात की. रमेश की दुकान धमाके वाली जगह के पास ही है. उन्होंने बताया, "कोई सवा छह बजे ज़ोरदार धमाके की आवाज़ सुनाई पड़ी, अभी लोग इसे समझ पाते इससे पहले 15 मिनट के बाद दूसरा धमाका हुआ." उनका कहना है, "इस धमाके से कुछ गाड़ियों को नुक़सान पहुँचा और कुछ दुकानों को नुक़सान पहुँचा. लेकिन कोई व्यक्ति हताहत नहीं हुआ." उनका कहना था कि ये बम कचरे के डिब्बे में रखा गया था और वहाँ लोगों के न होने से किसी को नुक़सान नहीं हुआ. गफ़्फ़ार मार्केट विस्फोट के एक और प्रत्यक्षदर्शी का कहना था कि उन्होंने ज़ॉर की आवाज़ सुनी, धुँआ उठता देखा और फिर वहाँ चार लोगों को एक के ऊपर एक गिरे हुए देखा. प्रत्यक्षदर्शी सुनील दत्त ने एक टेलीविज़न चैनल को बताया कि विस्फोट होते ही भगदड़ मच गई और लोग इधर-उधर भागने लगे. उनका कहना है कि वहाँ पुलिस वाले मौजूद थे और उन्होंने फ़ुर्ती से विस्फोट वाली जगह को घेर लिया और लोगों को वहाँ से हटाना शुरु किया. दत्त का कहना है कि विस्फोट के तुरंत बाद दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद करनी शुरु कर दीं. गफ़्फ़ार मार्केट का विस्फोट मुख्य बाज़ार इलाक़े की बजाय पार्किंग वाले इलाक़े में हुआ है और सुनील दत्त का कहना था, "अच्छा हुआ कि धमाका बाज़ार में नहीं हुआ नहीं तो बड़ा नुक़सान होता." | इससे जुड़ी ख़बरें दिल्ली में पाँच धमाके, 18 की मौत13 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस हमले अमानवीय कृत्य हैं: पाकिस्तान13 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस पिछले सिलसिलेवार धमाके13 सितंबर, 2008 | भारत और पड़ोस अहमदाबाद धमाके का 'सरगना' गिरफ़्तार16 अगस्त, 2008 | भारत और पड़ोस बंगलौर के बाद दहला अहमदाबाद, 38 मरे26 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस बंगलौर में कई धमाके, दो की मौत25 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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