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नेपाल में सैकड़ों तिब्बती गिरफ़्तार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में बसे हुए तिब्बती मूल के लोगों ने चीन में ओलंपिक के विरोध में ज़ोरदार प्रदर्शन किए हैं जिनमें सैकड़ों लोगों ने भाग लिया है. नेपाल में लगभग 20 हज़ार तिब्बती बसे हुए हैं. ये प्रदर्शन गुरुवार से ही हो रहे हैं और इनमें बौद्ध भिक्षुओं के साथ-साथ बड़ी संख्या में छात्रों ने भी हिस्सा लिया है. ये लोग धार्मिक मंत्रोच्चारण के साथ-साथ चीन की सरकार और चीनी राष्ट्रपति हू जिताओ के ख़िलाफ़ नारेबाज़े भी कर रहे हैं. बीबीसी संवाददाता चार्ल्स हेविलैंड के मुताबिक तिब्बती समुदाय में मूजौद सूत्रों ने उन्हें बताया है कि लगभग 900 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और पुलिस और भी तिब्बतियों के गिरफ़्तार कर रही है. उन्होंने ये भी कहा है कि प्रदर्शनकारियों में महिलाएँ भी शामिल थीं और जहाँ इनमें से अनेक लोग चीख रहे थे और रो रहे थे, वहीं महिला और पुरुष पुलिस अधिकारी उनके साथ बुरा बर्ताव कर रहे थे और उन्हें लाठियों से पीट भी रहे थे. 'चीन में मानवाधिकार नहीं' ये प्रदर्शन काठमांडू में चीनी दूतावास के बाहर और वीज़ी दफ़्तर के बाहर हुए हैं. ग़ौरतलब है कि इन सभी इलाक़ो में प्रदर्शन करने पर प्रतिबंध लगा हुआ है. हालाँकि पुलिस अधिकारियों का ये भी कहना है कि बीजिंग में ओलंपिक की शुरुआत से पहले बढ़े प्रदर्शनों के कारण ये गिरफ़्तारियाँ की गई हैं और दिन के अंत तक इन्हें रिहा कर दिए जाने की उम्मीद है. महत्वपूर्ण है कि इस साल मार्च में ल्हासा में हुए प्रदर्शनों को चीन की सरकार ने सख़्ती से दबाया था जिसके बाद नेपाल में बार-बार चीन विरोधी प्रदर्शन होते रहते हैं. समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार प्रदर्शनों में शामिल बीस साल के एक छात्र ने बताया, "हम सैकड़ों एथलीट्स और करोड़ों लोग जो ओलंपिक की शुरुआत देखेंगे, उन्हें ये संदेश देना चाहते हैं कि तिब्बत में मानवाधिकार नहीं हैं."
जब तिब्बती नेताओं ने मार्च में ये आरोप लगाए थे तब चीन की सरकार ने इन्हें ख़ारिज किया था और राष्ट्रपति हू जिंताओ ने कहा था कि इन प्रदर्शनों का संबंध मानवाधिकारों से नहीं बल्कि चीन की अखंडता से है. कई प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़पें भी हुई हैं और कुछ लोग घायल भी हुए हैं. पुलिस ने भी सख़्ती बरती है और कुछ जगह पर लाठी चार्ज भी किया है लेकिन एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "मैं यहाँ पर पिछले तीन महीने से विरोध प्रदर्शन करने आ रहा हूँ और आगे भी आता रहूँगा." ग़ौरतलब है कि गुरुवार को पुलिस ने नेपाल की राजधानी काठमांडू में लगभग दो हज़ार लोगों के एक प्रदर्शन को तितर-बितर किया था. भारत की राजधानी दिल्ली में भीषण प्रदर्शन हुए थे और निर्वासित तिब्बती नेता दलाई लामा के अनेक समर्थकों ने चीनी दूतावास के सामने प्रदर्शन करने कोशिश की थी. | इससे जुड़ी ख़बरें तिब्बत पर चीन ने भारत से सहयोग माँगा30 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस भारत-चीन रिश्तेः कड़वाहट के संकेत?27 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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