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गुरुवार, 17 जुलाई, 2008 को 09:18 GMT तक के समाचार
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'नहीं चाहिए देशभक्ति का सर्टिफ़िकेट'
सोनिया गांधी
सोनिया ने कहा कि एनडीए सरकार के समय तेल के दाम 35 डॉलर प्रति बैरल थे और अब 147 डॉलर प्रति बैरल हैं
भारत में सत्तारूढ़ यूपीए गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि देश की सुरक्षा, परमाणु हथियार कार्यक्रम और स्वतंत्र विदेश नीति पर समझौता करने का सवाल ही पैदा नहीं होता.

आंध्र प्रदेश में नैलौर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सोनिया गांधी ने कहा, "कांग्रेस पार्टी ने ही देश को आत्मनिर्भर बनाया है. इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने देश के लिए बलिदान दिए हैं. भारत की स्वतंत्र विदेश नीति, परमाणु हथियार कार्यक्रम कांग्रेस की ही देन हैं. हमें किसी भी अन्य पार्टी से देशभक्ति का सर्टिफ़िकेट नहीं चाहिए."

उनका कहना था कि यूपीए सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समझौते पर देश की जनता के हित में हस्ताक्षर किए हैं लेकिन उस पर देश के हितों की अनदेखी करने का आरोप लग रहा है.

एनडीए के समय तेल के दाम

सोनिया गांधी ने ज़ोर देकर कहा, "देश की सुरक्षा, उसके परमाणु हथियार कार्यक्रम और स्वतंत्र विदेश नीति से समझौता करने का सवाल ही पैदा नहीं होता. कांग्रेस इन मुद्दे पर कभी भी डगमगाई नहीं है....आने वाली पीढ़ियाँ ये समझ पाएँगी की इस समझौते की क्या अहमियत है और प्रधानमंत्री आज उनके के लिए क्या कर रहे हैं..."

 गांधी ने देश के लिए बलिदान दिए हैं. भारत की स्वतंत्र विदेश नीति, परमाणु हथियार कार्यक्रम कांग्रेस की ही देन हैं. हमें किसी भी अन्य पार्टी से देशभक्ति का सर्टिफ़िकेट नहीं चाहिए
सोनिया गांधी

भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर काफ़ी तल्ख़ अंदाज़ में उन्होंने कहा कि इस मसले पर वाम दलों ने सरकार से समर्थन वापस लिया है. उनका कहना था कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने देश की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए ऊर्जा सुनिश्चित करने के लिए ये समझौता किया है.

उनका कहना था कि इससे बिजली के साथ-साथ आधुनिक तकनीक जनता को मिलेगी जिससे कृषि क्षेत्र, औद्योगिक क्षेत्र, चिकित्सा जगत में अस्पतालों और ग्रामीण इलाक़ों को फ़ायदा मिलेगा.

सोनिया गांधी का कहना था कि जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार थी तब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल का दाम 35 डॉलर प्रति बैरल था जबकि अब वह लगभग 147 डॉलर प्रति बैरल है.

उनका कहना था कि भारत 75 प्रतिशत तेल आयात करता है इसलिए देश पर इसका काफ़ी बोझ पड़ा है लेकिन कांग्रेस की सरकारों ने आम जनता पर इसका बोझ कम करने की कोशिश की है.

सोनिया गांधी ने किसी दल का नाम लिए बिना कहा कि जहाँ अन्य दल लोगों को विभाजित करने और घृणा फैलाने की राजनीति में लगे हुए हैं, वहीं कांग्रेस इसका विरोध करने में जुटी हुई है.

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