BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 02 जुलाई, 2008 को 07:09 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
माओवादी हमले पर दो राज्यों में ठनी

खोजी दल
आंध्र प्रदेश और उड़ीसा में माओवादियों की गतिविधियां बढ़ गई हैं
उड़ीसा में रविवार को सुरक्षाकर्मियों पर हुए माओवादी हमले के बाद आंध्र प्रदेश और उड़ीसा की सरकारें एक दूसरे पर दोषारोपण करने में लगी हुई हैं.

उधर दोनों राज्यों की पुलिस माओवादी हमले में बचे सुरक्षाकर्मियों की तलाश में लगी हुई है.

रविवार को माओवादियों ने उड़ीसा के चित्रकुंडा जलाशय में आंध्र प्रदेश के उग्रवाद निरोधी दस्ते यानी ग्रेहाउंड के 30 जवानों पर हमला किया और उनकी नाव डुबो दी थी.

गृह मंत्री, आंध्र प्रदेश
 उड़ीसा में सड़क, खुफ़िया जानकारी और पुलिस तंत्र कमज़ोर है. वो हमारी तरह तेज़ तर्रार नहीं हैं. वो माओवादियों के ख़िलाफ़ उतनी तत्परता से कार्रवाई नहीं करते जैसा हम करते हैं
के जना रेड्डी

सोमवार को आंध्र प्रदेश के गृह मंत्री के जना रेड्डी ने उड़ीसा पुलिस पर इस हमले की ज़िम्मेदारी डाली और कहा, "उड़ीसा में सड़क, खुफ़िया जानकारी और पुलिस तंत्र कमज़ोर है. वो हमारी तरह तेज़ तर्रार नहीं हैं. वो माओवादियों के ख़िलाफ़ उतनी तत्परता से कार्रवाई नहीं करते जैसा हम करते हैं."

हालांकि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई राजशेखर रेड्डी ने कहा कि दोनों राज्यों की पुलिस के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए.

उड़ीसा पुलिस ने मंगलवार को इन बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस हमले के लिए फोर्स के जवान ही ज़िम्मेदार थे.

आरोप-प्रत्यारोप

उड़ीसा के गृह सचिव तरुण कांति मिश्रा का कहना था," ग्रेहाउंड फोर्स के जवानों ने रणनीतिक ग़लती की है. उन्हें जल के रास्ते की बजाय ज़मीन के रास्ते से जाना चाहिए था. उन्होंने अपने ही दिशानिर्देशों की अवहेलना की. कभी भी तलाशी अभियान में जल का रास्ता नहीं अपनाया जाता है."

हमले के बाद लापता जवानों की तलाश जारी है

मिश्रा ने यहां तक कहा कि इन जवानों ने दिन के उजाले में यात्रा की जो ग़लत तरीका है.

माओवादियों के इस हमले में बचे हुए जवान किसी तरह तैर कर जलाशय से बाहर निकले. उनका कहना था कि ग्रेहाउंड यूनिट के सभी जवान तीन दिन से चल रहे तलाशी अभियान के बाद बुरी तरह थक चुके थे और बेस कैंप लौटने की जल्दी में उन्होंने सुरक्षा निर्देशों का पालन नहीं किया.

इस हमले में बचे एक कांस्टेबल एक सुब्रमण्येश्वर राव का कहना था, "हमें 25 किलोमीटर का लंबा रास्ता पैदल तय करके बेस कैंप जाना चाहिए था जिसमें 24 घंटे लगते लेकिन हम इतना थक चुके थे कि हमने जलाशय का रास्ता अपनाया जो हमें भारी पड़ा."

गृह सचिव, उड़ीसा
 ग्रेहाउंड फोर्स के जवानों ने रणनीतिक ग़लती की है. उन्हें जल के रास्ते की बजाय ज़मीन के रास्ते से जाना चाहिए था. उन्होंने अपने ही दिशानिर्देशों की अवहेलना की
तरुण कांति मिश्रा

इतना ही नहीं जवानों ने यात्रा से पहले रास्तों की पर्याप्त जांच भी नहीं करवाई थी.

इस बीच जलाशय से एक और शव निकाला गया है जिस पर गोली के निशान हैं.

जिस मोटर लांच ( नौका) में ये सुरक्षाकर्मी सवार थे उसका ड्राइवर मनोरंजन डे हमले में बच गया था. उन्होंने बताया कि वो किसी तरह पानी में कूदे और जान बचाकर भागे लेकिन किनारे पर उन्हें माओवादियों ने पकड़ लिया.

डे के अनुसार जब उन्होंने माओवादियों को बताया कि वो पुलिसवाले नहीं बल्कि ड्राइवर हैं तो उनकी जान बख्श दी गई.

इससे जुड़ी ख़बरें
माओवादियों की गोलीबारी, आठ मरे
08 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस
नक्सली विस्फोट में 11 घायल
02 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस
माओवादियों के बंद के दौरान हिंसा
19 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>