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रविवार, 18 मई, 2008 को 06:23 GMT तक के समाचार
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पंचायत चुनाव में हिंसा, आठ मारे गए

हिंसक झड़प
अब तक पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव में जमकर हिंसा हुई है
पश्चिम बंगाल की पुलिस के अनुसार पंचायत चुनाव के दौरान हिंसा में आठ लोगों की मौत हो गई है. रविवार को आख़िरी दौर के लिए मतदान हुआ.

दूसरे चरण में मतदान के दौरान छह लोग मारे गए थे जबकि पहले चरण के मतदान के दौरान तीन लोग मारे गए थे.

पुलिस के मुताबिक ताज़ा हिंसा में 13 लोग घायल भी हो गए हैं. पुलिस का कहना है कि सत्तारूढ़ वामपंथी दलों के समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने दूसरी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हथियारों से हमले कर दिए.

दोनों तरफ़ से पिस्तौल, देसी बमों और तेज़ धारदार हथियारों का इस्तेमाल किया गया. बांग्लादेश से सटे मुर्शिदाबाद ज़िले में पाँच लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

यहाँ के दोमकल गाँव में कांग्रेस और वामदलों के समर्थकों ने एक दूसरे पर बम फेंके जिसमें एक महिला समेत तीन लोगों की मौत हो गई.

इसी तरह मुर्शिदाबाद के ही रानीनगर गाँव में एक कांग्रेस समर्थक को मार दिया गया. मधुगाँव में एक वामदल समर्थक को मौत के घाट उतार दिया गया.

सात ज़िलों में मतदान

पुलिस ने एक मार्क्सवादी समर्थक की लाश जलपाईगुड़ी के मदारीहाट गाँव से भी बरामद की है.

पिछले साल नंदीग्राम में सीपीएम और तृणमूल समर्थकों के बीच जम कर हिंसा हुई थी

इसी तरह बीरभूम ज़िले के नन्नूर गाँव में एक तृणमूल कांग्रेस समर्थक की लाश मिली है.

पंचायत चुनाव के दौरान जमकर हिंसा हुई है. बीरभूम के लबपुर इलाके में एक तृणमूल कांग्रेस नेता पर गोली चलाई गई है.

डॉक्टरों के मुताबिक इस तृणमूल नेता की हालत गंभीर बताई जा रही है.

बीती रात मालदा ज़िले के कालीचौक इलाके में एक कांग्रेस समर्थक की हत्या कर दी गई.

पिछले चरणों में हिंसा

पिछले गुरुवार को दूसरे चरण के मतदान में छह लोग मारे गए थे. इनमें चार दक्षिण 24 परगना के बसंती में दो वामदलों के बीच हुए आपसी झड़प में मारे गए थे.

11 मई को पहले चरण में मतदान के दौरान हुई हिंसा में तीन लोग मारे गए थे.

 पश्चिम बंगाल में विकास के ज़्यादातर काम इन्हीं पंचायतों के ज़रिए किए जाते हैं. इनके ज़रिए विधानसभा और लोकसभा चुनावों का मज़बूत आधार तैयार किया जाता है
रजत रॉय

पश्चिम बंगाल के चुनावों पर पैनी नज़र रखने वाले राजनीतिक विश्लेषक रजत रॉय के मुताबिक वामदल किसी भी तरह से पंचायत चुनाव में जीत हासिल करना चाहते हैं.

उनका कहना है, "दरअसल, सत्ता में आने के लिए ये चुनाव काफ़ी मददगार होते हैं."

रजत रॉय के मुताबिक, "पश्चिम बंगाल में विकास के ज़्यादातर काम इन्हीं पंचायतों के ज़रिए किए जाते हैं. इनके ज़रिए विधानसभा और लोकसभा चुनावों का मज़बूत आधार तैयार किया जाता है."

वो कहते हैं, "चुनावों से पहले प्रचार के दौरान भी काफी हिंसा होती है. कई बार वामपंथी दलों के अलग-अलग गुट भी इसमें उलझ पड़ते हैं."

पश्चिम बंगाल में वामदल पिछले तीस सालों से सत्ता में हैं. लेकिन पिछले दो सालों में नंदीग्राम और सिंगूर को लेकर वाम सरकार पर काफी उंगलियां उठी हैं.

इन इलाकों में सरकार पर आरोप लगते रहे हैं कि उसने कारखाने लगाने के लिए किसानों की ज़मीन पर ज़बरदस्ती कब्ज़ा किया.

रजत रॉय मानते हैं कि नंदीग्राम और सिंगूर का असर इन पंचायत चुनावों में हो सकता है.

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