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मदरसों में भी छाया क्रिकेट का जादू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आधुनिक कपड़े, खेल का रंग-बिरंगा सामान और क्रिकेट का जाना-पहचाना जुनून! इस्लामाबाद के हरे-भरे एंबेसी रोड क्रिकेट मैदान में हो रहा क्रिकेट मैच किसी भी अन्य जगह होने वाले क्रिकेट मैच की तरह ही नज़र आया. फ़र्क सिर्फ़ इतना कि यहाँ पर होने वाले मैच में सभी खिलाड़ियों की लंबी दाढ़ी थी, मैदान के एक तरफ़ लगे बैनर पर लिखा था– अंतर इस्लामाबाद मदरसा क्रिकेट टूर्नामेंट. इस प्रतियोगिता में खेलने वाले लड़के इस्लामाबाद के मदरसों के छात्र हैं. क़रीब एक साल पहले इस्लामाबाद में छात्रों के बारे में कहा जाता था कि वे इस्लामाबाद की सड़कों पर सुरक्षाबलों से भिड़ते हुए दिखाई देते थे. बदलाव ऐसा लगता है कि इस टूर्नामेंट के सहारे धार्मिक मदरसे बदनाम हो चुकी अपनी छवि को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं.
टूर्नामेंट आयोजक एक्लेट कांसेप्ट्स के ताहिर इनायत कहते हैं कि वो इस तरह ऐसे छात्रों को मुख्य धारा से जोड़ना चाहते हैं. बिजली की रोशनी में खेली गई इस प्रतियोगिता में 24 टीमों ने हिस्सा लिया और ये आठ दिन चली जिसका फ़ाइनल मैच शनिवार को खेला गया. याद रहे कि जुलाई 2007 में सुरक्षा बलों के लाल मस्जिद को घेरने की घटना में 100 से ज़्यादा लोग मारे गए थे. इस घटना के बाद पाकिस्तान में एक के बाद एक आत्मघाती हमले हुए. कुछ लोगों ने आशंका जताते हुए कहा था कि ये हमले लाल मस्जिद पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई का बदला लेने के लिए किए गए थे. कुछ लोगों का ऐसा भी कहना है कि ये हमले उत्तर-पश्चिम इलाकों में रहने वाले लोगों ने किए, जहाँ से ज़्यादातर छात्र लाल मस्जिद पढ़ने आते थे. पाकिस्तान में फ़रवरी में हुए आम चुनाव के बाद हालात में सुधार देखा जा रहा है. अंग्रेज़ी में निवेदन मैदान में टीमों को समर्थन देने वाले दर्शकों की भी कमी नहीं थी. खिलाड़ी अम्पायरों से अंग्रेज़ी में अपील करते थे. वो खिलाड़ी भी पीछे नहीं रहे जिन्हें अंग्रेज़ी ज़्यादा अच्छी तरह नहीं आती थी.
जामिया सल्फ़िया मदरसे के अध्यापक अब्दुल हनान का कहना था कि ऐसी प्रतियोगिताओं से विभिन्न मदरसों के बीच जु़ड़ाव बढ़ेगा. अब्दुल हनान कहते हैं कि ये प्रतियोगिता छात्रों को साथ लाने के लिए एक प्लेटफ़ॉर्म प्रदान करेगी. कुछ खिलाड़ी मीडिया से ज़्यादा बातचीत के लिए इच्छुक नहीं थे, हालांकि कुछ अन्य खिलाड़ियों ने मीडिया का ख़ुले दिल से स्वागत किया. विवाद इस प्रतियोगिता के मैच टेनिस बॉल से खेले गए. ऐसा नहीं था कि ये प्रतियोगिता विवादों के घेरे में नहीं थी. पाकिस्तान में मदरसे चलाने वाले कई बोर्डों में से एक ने इस प्रतियोगिता का विरोध किया और इसे ग़ैर-इस्लामिक क़रार दिया. इसके बाद चार टीमों ने प्रतियोगिता से अपना नाम वापस ले लिया. मैदान में मौजूद कुछ खिलाड़ियों ने कहा कि वे अपने शिक्षकों की इच्छा के विरुद्ध आए हैं. एक खिलाड़ी अमजद अली ने कहा कि सरकार को ऐसे खेलों का आयोजन करना चाहिए. उनका कहना था कि वो साबित करना चाहते हैं कि वो सब आतंकवादी नहीं हैं. बैडमिंटन एक और खेल जो पास के ही एक और स्टेडियम में, मीडिया की नज़रों से दूर, हो रहा था, वो था बैडमिंटन का.
अपनी तरह की ये पहली प्रतियोगिता लाल मस्जिद के पास स्थित मदरसा हफ्सा में पढ़ने वाली लड़कियों के लिए आयोजित की गई. मदरसा हफ्सा को ढहा दिया गया था. हालांकि ताहिर इनायत ने बीबीसी को बताया कि महिला पत्रकारों को भी इस प्रतियोगिता को रिपोर्ट करने की इजाज़त नहीं थी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'मस्जिद की ख़ातिर मरने के लिए तैयार थी'19 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस लाल मस्जिद के पास धमाका, 13 की मौत27 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस लाल मस्जिद विस्फोट की जाँच शुरू28 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस 'धार्मिक स्थल पर चरमपंथियों का कब्ज़ा'30 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस नहीं भूल पाए लाल मस्जिद ऑपरेशन... 17 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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