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रोज़गार गारंटी योजना पूरे देश में लागू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ग़रीबी दूर करने के लिए केंद्र सरकार की अब तक की सबसे बड़ी रोज़गार योजना मंगलवार से पूरे देश में लागू की जा रही है. राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना केंद्र की सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार की सबसे महात्वाकांक्षी योजना है. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस योजना को पूरे देश में लागू करने के लिए व्यापक तैयारियाँ की हैं. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख कर इस योजना में सहयोग देने का अनुरोध किया है, ताकि अधिक से अधिक से लोग लाभान्वित हो सकें. इस योजना के तहत ग़रीब परिवारों के एक सदस्य को साल में कम से कम 100 दिन रोज़गार उपलब्ध कराया जाएगा. इसके तहत काम पाने वाले व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 60 रुपए की मजदूरी मिलेगी या दैनिक मजदूरी का भुगतान राज्यों में तय न्यूनतम मजदूरी के बराबर होगा. पंचायतों की भूमिका इसको लागू करने में पंचायतों की प्रमुख भूमिका है. रोज़गारी गारंटी विधेयक के प्रावधानों के तहत इस योजना पर ग्राम सभा का नियंत्रण और निगरानी रहती है. इस योजना की शुरूआत फ़रवरी, 2006 में देश के 200 ज़िलों से की गई थी. बाद में इसमें 130 और जिलों को शामिल कर लिया गया था और मंगलवार से देश के बाकी के 274 और ज़िले इसमें शामिल हो जाएँगे. सरकार का कहना है कि इस योजना के तहत वर्ष 2007-08 के दौरान लगभग तीन करोड़ से अधिक परिवारों को रोज़गार मुहैया कराया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना के इरादे नेक हैं. इसके तहत रोज़गार को बतौर योजना नहीं बल्कि एक क़ानूनी हक़ के तौर पर पेश किया गया है. |
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