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गुरुवार, 27 मार्च, 2008 को 19:33 GMT तक के समाचार
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'देवी' के निर्देश पर 'डायन' की हत्या

काला जादू
अभी भी कई कुरीतियाँ और अंधविश्वास समाज में जीवित हैं
कहने के लिए हम 21वीं सदी में ज़रूर हैं पर आडंबरों और अंधविश्वासों की बानगी अभी भी अपना काला चेहरा दिखाती मिल जाती हैं.

ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के कोरिया ज़िले में सामने आया है. यहाँ पुलिस ने एक महिला को डायन बताकर प्रताड़ित करने और जान से मारने के आरोप में 17 लोगों की गिरफ़्तार किया है.

फूल कुंवर नाम की इस महिला को डायन बताकर मारने वालों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं जिन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार किया है.

पुलिस अधिकारी राजेश्वर सिंह ने बताया कि कोरिया ज़िले के धवलपुर गाँव के लोगों ने इसी सप्ताह की शुरुआत में पहले तो फूल कुंवर को उसके घर से घसीट कर निकाला, लाठी डंडों से उसकी पिटाई की, लोहे कि गर्म सलाखों से दागा और फिर जब वह ज़ुल्म से मर गयी तो उसकी लाश को एक नाले के पास गड्ढा खोद कर दफ़ना दिया.

गाँव वालों ने उसका मुँह जलते हवन में डाल दिया था जिस से उसका चेहरा बुरी तरह झुलस गया था.

गाँव वालों ने इस महिला के परिवारवालों को घटना की जानकारी प्रशासन को न देन कि धमकी दी थी.

डरे-सहमे परिवारवालों ने पुलिस से इसकी शिकायत एक दिन बाद की जिसके बाद कब्र खोदकर लाश को निकाला गया, उसका पोस्टमार्टम हुआ और फिर इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 17 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है.

'देवी के निर्देश पर...'

गुरुवार को इन अभियुक्तों को अदालत में पेश किया गया जहाँ मौजूद लोगों का कहना था कि अभियुक्तों ने इस पूरी घटना पर कोई मलाल नहीं ज़ाहिर किया.

एक महिला, रुक्या ने अदालत के बाहर खड़े लोगों के मुताबिक कहा कि उन लोगों को फूल कँवर के डायन होने कि बात देवी ने बताई थी और वह कैसे ग़लत हो सकती हैं?

ग्रामीणों ने एक पत्रकार से कहा कि यह घटना रविवार को शुरू हुई जब एक सामुहिक हवन के दौरान एक महिला ने दावा किया कि देवी ने उससे कहा है कि फूल कँवर जादूगरनी है और उसे उसकी सज़ा दी जानी चाहिए.

उस औरत के शरीर पर 'देवी' होने के कारण गाँववालों ने उसकी बात को सच माना और फूल कँवर पर प्रताड़ना का दौर शुरू हो गया.

घटना पर अपनी टिप्पणी देते हुए रायपुर स्थित शोधकर्ता दिनेश मिश्रा ने कहा कि गर्मियों के मौसम के शरू होते ही इस तरह की घटनाएं सामने आने लगती हैं क्योंकि गर्मी और बरसात के दौरान कई लोग बीमार होते हैं और फिर स्वास्थ्य सुविधाओं कि कमी के कारण बैगा, गुनी, ओझाओं के यहाँ इलाज के लिए जाने लगते हैं.

जब वे इन बीमारियों का इलाज करने में नाकामयाब होते हैं तो उसका इल्ज़ाम किसी कथित डायन, जादूगर और काले इल्म पर डाल देते हैं.

दिनेश मिश्र के रिसर्च पेपर के अनुसार यह कुरीति सबसे अधिक उत्तरी, पूर्वी और मध्य भारतीय राज्यों में सुनने में आती है चूँकि यह सामजिक तौर पर भी पिछडे हुए हैं.

कुछ बरस पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश भर में एक साल के भीतर 242 ऐसे मामलों का हवाला दिया था जिनमें या तो किसी व्यक्ति को, जो ज़्यादा मामलों में महिलाएं थीं, या तो डायन कहकर प्रताड़ित किया गया था या इस दौरान उनकी मौत हो गई थी.

छत्तीसगढ़ में ही पिछले साल ऐसे 160 मामले सामने आए थे.

रिसर्च पेपर के अनुसार यह तो ऐसे सभी मामलों का अंश मात्र हैं क्योंकि गांववालों के डर से ज़्यादातर ऐसे मामलों की प्राथमिकी तक दर्ज नहीं हो पाती है.

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