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सबने जोड़ा रेल बजट को चुनावों से | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अख़बारों ने लालू प्रसाद यादव के रेल बजट को आगामी चुनावों से जोड़ कर देखा है और ज़्यादातर अख़बारों ने इस बजट की तारीफ़ की है. हालांकि कुछ अख़बारों ने रेल बजट में किए गए वादों और रेलमंत्री के बजट भाषण की पड़ताल करने की कोशिश भी की है. बजट की प्रति के साथ रेलमंत्री की परंपरागत तस्वीर प्रकाशित करने की जगह ज़्यादातर अख़बारों ने लालू प्रसाद यादव का 'कैरिकैचर' या व्यंग्य चित्र प्रकाशित करना पसंद किया है. अगर बुधवार के अख़बारों को देखें तो लगता है कि भारत में क्रिकेट से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण या रुचिकर ख़बरें हो सकती हैं क्योंकि होबार्ट वनडे में श्रीलंका पर हुई शानदार जीत की ख़बर पहले पेज पर भले हों वो रेल बजट और लालू प्रसाद यादव के नीचे दब सी गई हैं. तरह-तरह के लालू अख़बारों ने जो व्यंग्य चित्र प्रकाशित किए हैं उसमें लालू तरह-तरह के रुपों में दिखाई दे रहे हैं. 'नवभारत टाइम्स' ने लालू को 'ओम शांति ओम' वाले शाहरुख़ ख़ान की तरह पेश किया है जिसमें वे अपना गठीला बदन दिखा रहे हैं और अख़बार ने शीर्षक लगाया है, 'वोट जुटाने का तगड़ा जैक, लालू का सिक्स पैक'. अख़बार ने सिक्स पैक का विवरण देने के लिए मिस्टर पॉपुलर, सस्ती रेल यात्रा, हाईटेक रेलवे जैसे शीर्षकों के साथ बजट का विवरण दिया है. साथ ही अख़बार ने याद किया है कि इससे पहले कुल्हड़ की बात करने वाले लालू प्रसाद यादव ने इस बार न तो कुल्हड़ की बात की न खादी, सिलबट्टे में पिसे हुए मसाले और न देसी चीज़ों की. 'हिंदुस्तान टाइम्स' ने लालू प्रसाद यादव को कृष्णावतार में पेश किया है जिसमें वे एक हाथ में सुदर्शन चक्र की तरह संसद को थामे हुए हैं और दूसरे हाथ से बजट का ब्रीफ़केस थामे हुए रुपए लुटा रहे हैं. अख़बार ने रेल बजट को 'बैलेट ट्रेन' यानी मतदानपत्र वाली ट्रेन का नाम दिया है और कहा है कि रेलमंत्री ने चुनावी साल में ट्रेन में यात्रा का नया अनुभव देने का वादा किया है. 'अमर उजाला' ने लालू प्रसाद यादव को ऐसे कुली के रुप में चित्रित किया है जो सर पर ताज पहने हुए है और अपने कंधों पर तोहफ़ो का ढेर लिए हुए है. अख़बार ने बजट को शीर्षक दिया है, 'लालू हुए कृपालु'. अख़बार ने ख़बर के साथ ही टिप्पणी दी है, "वाकई लालू कमाल के हैं, वह बिहार की इस कहावत को चरितार्थ करते हैं कि लालू लालू हैं और बाक़ी सब आलू." 'दैनिक हिंदुस्तान' ने 'चुनावी पटरी पर रियायतों की रेल' शीर्षक के साथ टिप्पणी दी है कि इस बजट के ज़रिए लालू प्रसाद यादव ने अपने वोट बैंक का दायरा बढ़ाया है. इस ख़बर में लालू रेल पर एक तराजू लिए हुए दिखाए गए हैं. इस तराजू के एक पलड़े पर संसद और अर्थव्यवस्था को चित्रित किया गया है और दूसरे पलड़े पर मतदाता को. लालू प्रसाद यादव को कहते हुए दिखाया गया है कि इस बार फिर मतदाता वाला पलड़ा ही भारी हो गया. पड़ताल
'जनसत्ता' ने बजट की ख़बर के साथ अपने संवाददाता के हवाले से लिखा है, "होता रहा हंगामा और लालू ठोकते रहे अपनी पीठ" अख़बार ने रियायतों की घोषणा के बारे में कहा है, "रियायतों के पीछे जो पेंच थे उसका जवाब देना रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष को भी मुश्किल पड़ रहा था." इस पेंच को 'इंडियन एक्सप्रेस' ने एक हद तक खोलने की कोशिश की है और ख़बर दी है कि एसी श्रेणी में रियायतों की जो घोषणा की गई है वह साल में सिर्फ़ तीन महीने मिलेगी. अख़बार का कहना है कि यह छूट उन 450 ट्रेनों में लागू नहीं होगी जिसे रेलवे 'पॉपुलर' ट्रेन मानता है. लगभग सभी अख़बारों ने रेल बजट पर संपादकीय टिप्पणियाँ लिखी हैं जिसमें आमतौर पर रेलबजट की सराहना की गई है और आधुनिकीकरण की घोषणाओं का स्वागत किया गया है. लेकिन 'नवभारत टाइम्स', 'जनसत्ता' और 'जागरण' से लेकर 'इकॉनॉमिक टाइम्स' तक सभी अख़बारों ने पुरानी योजनाओं के लंबित पड़े होने पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि घोषणाओं को अमल में लाकर भी दिखाना होगा. |
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