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गुरुवार, 07 फ़रवरी, 2008 को 16:28 GMT तक के समाचार
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बिहार के सरकारी डॉक्टर हड़ताल पर

हड़ताल से बंद पड़ा एक अस्पताल
डॉक्टरों का कहना है कि उनकी माँग बहुत पुरानी है
बिहार के चार हज़ार सरकारी डॉक्टर 48 घंटों की सांकेतिक हड़ताल पर चले गए हैं.

डॉक्टरों की यह हड़ताल बुधवार को आधी रात के बाद से शुरु हुई है.

वे अपने लिए केंद्रीय वेतनमान और केंद्र सरकार के डॉक्टरों को मिलने वाली सुविधाओं तरह सुविधाओं की माँग कर रहे हैं.

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी माँगें पूरी नहीं हुईं तो 21 फ़रवरी से वे बेमियादी हड़ताल पर चले जाएँगे.

डॉक्टरों का कहना है कि उनकी यह माँग पुरानी है और 12 साल पहले राज्य सरकार ने इसका आश्वासन दिया था लेकिन उसके बाद से इसे लगातार टाला जा रहा है.

दूसरी ओर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री चंद्रमोहन राय का कहना है कि डॉक्टरों की माँग पूरी करने में सरकार के सामने वित्तीय समस्या सामने आ रही है और कुछ तकनीकी समस्याएँ भी हैं.

वो कहते हैं, "इसके बावजूद केंद्र सरकार के चिकित्सकों के समान वेतन भत्ता और अन्य सुविधाएँ दी जा सकती है बशर्ते वो निजी प्रैक्टिस नहीं करने का क़ानूनी शपथ लें."

उनका कहना है कि डॉक्टरों को अपनी माँगे मनवाने के लिए हड़ताल को हथियार की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और यह तरीक़ा अमानवीय है.

चंद्रमोहन राय ने कहा, "डॉक्टरों की जितनी भी जायज़ माँगें हैं उन पर राज्य सरकार का रवैया सकारात्मक है और उन पर बात भी चल रही है."

हड़ताल

इस हड़ताल का आह्वान बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ ने किया है.

संघ का कहना है कि उनके चार हज़ार सदस्य हैं और वे सभी हड़ताल पर हैं.

इस हड़ताल के दौरान सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर ने तो बाह्य चिकित्सा विभाग (ओपीडी) में जाएँगे और न ऑपरेशन करेंगे.

संघ ने कहा है कि राज्य सरकार के टालमटोल से वे परेशान हो गए हैं और अब अगर उनकी माँगें पूरी नहीं हुईं तो वे 21 फ़रवरी से राज्यव्यापी बेमियादी हड़ताल पर चले जाएँगे.

हालांकि बड़े मेडिकल कॉलेजों के शिक्षक डॉक्टर इस हड़ताल में शामिल नहीं हैं और वे मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में काम करते रहेंगे.

इसके अलावा शहर के सारे निजी डॉक्टर पूर्ववत काम करते रहेंगे और निजी अस्पतालों भी चालू रहेंगे.

माना जा रहा है कि इस हड़ताल का असर बड़े शहरों में तो भले ही न दिखाई दे लिए छोटी जगहों और दूसरस्थ इलाक़ों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है.

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