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छत्तीसगढ़ में गुटखे की तस्करी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सोना-चांदी और हथियारों की तस्करी के किस्से तो आम हैं लेकिन छत्तीसगढ़ में इन दिनों जर्दायुक्त गुटखे की तस्करी चल रही है. पड़ोसी राज्यों से हर दिन लाखों रुपए का गुटखा प्रदेश में आ रहा है, जिसे चोरी-छुपे छत्तीसगढ़ के कोने-कोने तक पहुँचाया जा रहा है. एक जनवरी, 2008 से राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ में जर्दायुक्त गुटखा की बिक्री पर पाँच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है. इस प्रतिबंध के बाद से ही यह स्थिति बनी हुई है. एक अनुमान के अनुसार राज्य में हर महीने लगभग 10 करोड़ रुपए के गुटखे की बिक्री होती है. देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले गुटखे के अलावा राज्य के कई शहरों में स्थानीय निर्माता कंपनियां गुटखा बनाती रही हैं. इस प्रतिबंध के बाद जर्दायुक्त गुटखा बनाने, बेचने और भंडारण का काम प्रभावित हुआ है. राज्य में जर्दायुक्त गुटखा बनाने और भंडारण करने वाली संस्थाओं को बंद करा दिया गया है. जर्दायुक्त गुटखा बेचने वाले कुछ थोक विक्रेताओं पर कार्रवाई भी की गई है. इस प्रतिबंध के बाद से राज्य में पान और पान मसाले की क़ीमत बढ़ गई है. लेकिन जर्दायुक्त गुटखा पर प्रतिबंध का असर इसके शौकीनों पर नहीं पड़ा है. थोड़ी अधिक रकम खर्च करने पर उन्हें आसानी से जर्दायुक्त गुटखा मिल रहा है. तस्करी जर्दायुक्त गुटखा बेचते पाए जाने पर तीन साल तक की क़ैद और जुर्माने के प्रावधान के बाद भी छोटे-बड़े शहरों और क़स्बों में जर्दायुक्त गुटखा की बिक्री चल रही है.
राज्य भर में ऐसा गिरोह सक्रिय हो गया है जो इंदौर, कानपुर, दिल्ली, झारखंड और उड़ीसा से बड़ी मात्रा में चोरी-छुपे जर्दायुक्त गुटखा लाकर राज्य में खपा रहा है. जर्दायुक्त गुटखा की तस्करी में उड़ीसा की कुछ महिलाओं का गिरोह भी जुटा हुआ है. जर्दायुक्त गुटखा के शौकीन दुर्ग के भीष्म चंद्राकर कहते हैं, "जेब में रुपए हों तो आपको एटम बम मिल जाए. ये तो गुटखा है." असल में जर्दायुक्त गुटखा की बिक्री रोकने की ज़िम्मेदारी प्रशासन के खाद्य नियंत्रक एवं औषधि विभाग के पास है, लेकिन इस विभाग में अधिकारियों-कर्मचारियों की नियुक्ति वर्षों से नहीं हुई है. राजधानी रायपुर का हाल ये है कि विभाग में फूड इंस्पेक्टर के 30 पद हैं लेकिन उनमें से 27 पद खाली हैं. चुनौती जर्दायुक्त गुटखा पर प्रतिबंध को लेकर गुटखा निर्माता लामबंद होने लगे हैं. राजश्री गुटखा के संचालक के पी सुगंध के अनुसार इस तरह के प्रतिबंध का अधिकार राज्य सरकार को नहीं है. उन्होंने उच्च न्यायालय में सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए एक याचिका भी दायर की है. सरकारी प्रतिबंध की आलोचना करने वालों का तर्क है कि सरकार पान मसाला, जर्दा, नशीले द्रव्य और पदार्थ पर प्रतिबंध लगाने के बजाए केवल जर्दायुक्त गुटखा पर प्रतिबंध लगा कर सस्ती लोकप्रियता पाना चाह रही है. छत्तीसगढ़ समाज पार्टी के अध्यक्ष अनिल दुबे कहते हैं, " राज्य में दांतों को साफ़ करने के नाम पर गुड़ाखू का नशा करने वालों की संख्या जर्दायुक्त गुटखा खाने वालों की तुलना में कहीं अधिक है. सरकार को सबसे पहले गुड़ाखू पर प्रतिबंध लगाना चाहिए." |
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