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नए नियम के ख़िलाफ़ हैं बीड़ी मजदूर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हैदराबाद में हज़ारों की तादाद में बीड़ी बनाने वाले श्रमिकों ने केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ सोमवार को जमकर विरोध-प्रदर्शन किया है. बीड़ी बनाने वाले ये लोग सरकार के उस नियम के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं जिसके तहत कहा गया है कि बीड़ी के बंडल पर ख़तरे का निशान (कपाल और हड्डी वाला) लगाना अनिवार्य होगा. इसके पीछे सरकार का तर्क है कि यह नियम उन लोगों को धूम्रपान के बारे में चेतावनी देने के लिए है जो कि अशिक्षित हैं और लिखी हुई वैधानिक चेतावनी को पढ़ नहीं सकते हैं. बीड़ी श्रमिकों का कहना है कि ऐसा करने से इस उद्योग से जुड़े तक़रीबन 20 लाख लोगों की जीविका पर असर पड़ेगा. उधर राज्य विधानसभा ने भी इस आदेश को वापस लेने की माँग करते हुए इस बारे में एक प्रस्ताव पारित कर दिया है. राज्य के मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी की ओर से पेश किए गए इस प्रस्ताव में राज्य विधानसभा ने केंद्र सरकार से कहा है कि अगर इस नियम को वापस नहीं लिया जाता है तो इससे राज्य में बीड़ी उद्योग पर आश्रित 18लाख से ज़्यादा लोगों की जीविका पर सवालिया निशान लग जाएगा. इस बाबत मुख्यमंत्री ने कहा है कि देशभर में क़रीब तीन करोड़ लोग बीड़ी उद्योग के ज़रिए रोज़गार पाते हैं. ऐसे में केंद्र सरकार के इस नए नियम से इन्हें भी ख़तरा महसूस हो रहा है. विपक्ष भी साथ बीड़ी के बंडल पर ख़तरे का निशान लगाने के इस नियम के ख़िलाफ़ राज्य का विपक्ष भी सरकार के साथ सुर मिलाता दिखा. राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि केंद्र सरकार के इस नियम ने बीड़ी उद्योग के लोगों को डराने का काम किया है. उल्लेखनीय है कि राज्य के अन्य राजनीतिक दलों ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार से इस नियम को वापस लेने की बात कही है. केंद्र सरकार की ओर से लागू किया गया यह नया नियम अगल वर्ष फ़रवरी से प्रभावी हो जाएगा. | इससे जुड़ी ख़बरें सिगरेट कंपनियों के ख़िलाफ़ मुकदमा दायर25 सितंबर, 2006 | कारोबार दूसरों के धूम्रपान से हड्डियों को नुक़सान06 अगस्त, 2006 | विज्ञान फ़िल्मों में धूम्रपान पर प्रतिबंध01 जून, 2005 | भारत और पड़ोस भूटान में तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध लागू17 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस धूम्रपान ने किया स्कूल से दूर25 मई, 2003 | विज्ञान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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