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सोमवार, 28 जनवरी, 2008 को 13:01 GMT तक के समाचार
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भाजपा संगठन में महिलाओं को आरक्षण

भारतीय जनता पार्टी
पार्टी ने सांगठनिक ढाँचे में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का फ़ैसला किया है
भारतीय जनता पार्टी ने दल के सांगठनिक ढाँचे में महिलाओं की 33 प्रतिशत हिस्सेदारी तय कर दी है.

ये फ़ैसला दिल्ली में चल रही राष्ट्रीय परिषद की बैठक में लिया गया.

इसके लिए पार्टी के संविधान में ज़रूरी संशोधन भी कर दिया गया है. पार्टी संगठन में आरक्षण की नई व्यवस्था तीन महीनों के भीतर लागू हो जाएगी.

भारतीय जनता पार्टी की बैठक जब रविवार को शुरू हुई थी तो कहा गया था कि ये बैठक “इनपुट ड्रिवन” होगी यानि विभिन्न मुद्दो पर पार्टी नेताओं की राय ली जाएगी.

लेकिन बैठक में भाजपा इस बात की भी पुरज़ोर कोशिश कर रही है कि मतदाताओं की पार्टी के बारे में राय बदली जा सके.

पार्टी के सांगठनिक ढांचे में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना इसी दिशा में लिया गया एक कदम है.

भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर कहतें है कि इस मुद्दे पर पार्टी में किसी तरह का अंतर विरोध नहीं था.

प्रकाश जावड़ेकर ने कहा,“ भाजपा मानती है कि जब तक देश की 50 फ़ीसदी महिलाओं की आबादी सक्षम नहीं होगी तब तक देश का विकास अधूरा रहेगा.”

संसदीय बोर्ड में आरक्षण नहीं

 संसदीय बोर्ड एक अलग बोर्ड होता है और ज़िला या मंडल स्तर पर नहीं होता इसलिए सांगठनिक ढांचे में आरक्षण देने का लाभ ये होगा कि देश भर में हज़ारों इकाइयों को इसका लाभ मिलेगा
प्रकाश जावड़ेकर

ख़ास बात है कि ताज़ा आरक्षण सिर्फ़ सांगठनिक ढांचे पर लागू होगा यानि नीतिगत फ़ैसले करने वाली सर्वोच्च संस्था पार्टी संसदीय बोर्ड में ये आरक्षण लागू नही होगा.

संसदीय बोर्ड में महिलाओं को आरक्षण नही देने पर प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि संसदीय बोर्ड एक अलग बोर्ड होता है और ज़िला या मंडल स्तर पर नहीं होता इसलिए सांगठनिक ढांचे में आरक्षण देने का लाभ ये होगा कि देश भर में हज़ारों इकाइयों को इसका लाभ मिलेगा.

प्रकाश जावड़ेकर के अनुसार आने वाले दिनो में केंद्रीय कार्यसमिति में 14 महिलाओं प्रतिनिधियों को स्थान मिलेगा और चार महिला पदाधिकारी भी होंगीं.

‘आरक्षण से लाभ’

संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण पर आमराय नहीं बन पा रही थी. ऐसे में चुनाव आयोग ने प्रस्ताव दिया था कि सभी राजनीतिक दल स्वयं 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं को दें.

भाजपा की राजनीति पर नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कौशल मानते है कि पार्टी अब ये संदेश देना चाहती है कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर वो सबसे ज़्यादा गंभीर है.

प्रदीप कौशल मानते हैं कि भले ही आरक्षण फ़िलहाल संसदीय बोर्ड पर लागू ना हो लेकिन फिर भी ये महत्वपूर्ण है.

उनके अनुसार इस फ़ैसले की एक वजह ये भी हो सकती है अगले लोकसभा चुनावो से पहले पार्टी अपनी उस छवि को बदलना चाहती है जिसमें भाजपा महिलाओं, अल्पसंख्यकों और कमज़ोर वर्गों को लेकर उतना प्रगतिशील नही दिखाई देता.

हाल ही में गुजरात विधानसभा चुनावो में भाजपा को महिला मतदाताओं से मिलने वाले वोटों में चार प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ था.

पार्टी का कहना है कि ताज़ा फ़ैसले से महिलाएं पार्टी की और ज़्यादा आकर्षित होंगी.

अब भले ही इस निर्णय की वजह राजनीतिक हो या नेकनीयत- महिलाओं को तो आरक्षण का लाभ मिलेगा ही.

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