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पुलिस फ़ायरिंग के विरोध में 'बिहार बंद' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पिछले दिनों बिहार के भागलपुर ज़िले में हुई पुलिस फ़ायरिंग के विरोध में विपक्षी दलों के 'बिहार बंद' का राज्य में मिलाजुला असर देखने को मिल रहा है. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के बंद के इस आहवान को कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (सीपीआई), लोकजनशक्ति पार्टी (एलजेपी) और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने समर्थन देने की घोषणा की है. हालांकि दिन की शुरुआत सामान्य तरीके से ही होती नज़र आई और आम जनजीवन पर इसका असर कम ही दिख रहा है. पर भागलपुर के कहलगाँव में पुलिस कार्रवाई का निशाना बने लोगों की समिति ने इस बंद से अपना पल्ला झाड़ लिया है. समिति का कहना है कि वे इस मुद्दे पर किसी भी तरह की राजनीति से बचना चाहते हैं. उनका विरोध बिजली आपूर्ति में गड़बड़ियों को लेकर था और सरकार ने अब उनकी सारी मांगें मान ली हैं इसलिए बंद से उनका कोई वास्ता नहीं है. सरकार ने सभी ज़िलों में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं और कई ज़िलों में अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है. विवाद
दरअसल, यह विवाद शुरू हुआ था भागलपुर ज़िले के कहलगाँव शहर में बिजली आपूर्ति की गड़बड़ियों को लेकर. इस इलाके में एनटीपीसी का एक बड़ा बिजली कारखाना है. स्थानीय लोगों का आरोप था कि उन्हें पर्याप्त बिजली नहीं मिल पाती. गत 17-18 जनवरी को नियमित बिजली आपूर्ति की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने फ़ायरिंग की थी जिसमें कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई थी. इसके बाद राज्य सरकार ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए कुछ अधिकारियों के तबादले कर दिए थे और मृतकों के परिजनों को राहत राशि देने की बात कही गई थी. साथ ही घटना की न्यायिक जाँच के आदेश भी जारी किए जा चुके हैं. सस्ती राजनीति और विरोध कहलगांव में बिजली आपूर्ति के मुद्दे पर राज्य सरकार का विरोध कर रहे लोगों की समिति ने बताया है कि अब उनकी माँगें मान ली गई हैं इसलिए उनका बंद से कोई सरोकार नहीं है.
पर विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में लगा हुआ है. विपक्षी दल इस घटना के आधार पर राज्य में बदतर बिजली आपूर्ति और क़ानून व्यवस्था की बिगड़ी स्थिति की दुहाई दे रहे हैं. राज्य सरकार का कहना है कि केंद्र उसके कोटे की बिजली भी मुहैया नहीं करवा रहा है जबकि केंद्र सरकार में शामिल बिहार के राजनीतिक दलों का कहना है कि राज्य सरकार बिजली आपूर्ति का प्रबंध नहीं कर पा रही है. उल्लेखनीय है कि मुख्य विपक्षी दल आरजेडी ने इसके ख़िलाफ़ 20 जनवरी को राज्यव्यापी कालादिवस मनाने की घोषणा की थी लेकिन उसका कोई बड़ा असर राज्य में नहीं दिखाई पड़ा था. गुरुवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी-लेनिनवादी) ने भी इसी मुद्दे पर बंद का आह्वान किया था पर उसका भी असर न के बराबर ही रहा. | इससे जुड़ी ख़बरें पुलिस फ़ायरिंग के विरोध में कालादिवस20 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस बिहारः पुलिस कार्रवाई में तीन की मौत19 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस तीन राज्यों में माओवादियों का बंद19 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बिहार बंद का आंशिक असर02 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस पत्रकारों पर हमले के विरोध में बिहार बंद01 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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