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रविवार, 16 दिसंबर, 2007 को 16:00 GMT तक के समाचार
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'कायम है राजनीति पर सुखराम की पकड़'

सुख राम
सुख राम के बेटे के प्रचार अभियान में राहुल गांधी ने हिस्सा लिया
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में पंडित सुख राम एक बड़ा नाम रहा है.वे अब तिरासी साल के हैं और उन्हें अब सुनने में थोड़ी परेशानी होती है.

मंडी में अपने आलीशान बंगले में वे सबसे बड़े प्यार से मिलते हैं. अब जबकि उनके पुत्र अनिल शर्मा कांग्रेस की तरफ़ से चुनाव लड़ रहे हैं, उनकी ज़िम्मेदारियां बढ़ गई हैं.

राजनीति में उनकी पकड़ का ही नतीजा था कि रविवार को राहुल गांधी अनिल शर्मा के लिए चुनाव प्रचार करने मंडी पहुंचे.

केंद्रीय संचार मंत्री के अपने कार्यकाल में पंडित सुखराम ने ज़िंदगी के सबसे अच्छे दिन और बुरे दिन दोनो ही देखें हैं.

उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे. केंद्रीय जांच ब्यूरो के उनके घर पर छापे के दौरान कथित तौर पर काफ़ी पैसा बरामद किया गया.

लोगों ने उन्हें काफ़ी बुरा भला कहा और न्यायालय में अभी भी उनके खिलाफ़ भ्रष्टाचार के मामले चल रहे हैं.

इन आरोपों ने उनको केन्द्र की राजनीति से बाहर कर दिया हो पर मंडी के लोगों में उन आरोपों पर मिली जुली ही प्रतिक्रिया रही.

राजीतिक प्रभाव

आज भी मंडी की राजनीति पर उनका अच्छा खासा प्रभाव है. मंडी के लोगों ने बताया कि उनके लिए जो काम सुखराम ने किया, वो काम मंडी के किसी और राजनेता ने नहीं किया.

उनके अनुसार सुखराम ने हिमाचल, खासकर मंडी में, संचार क्रान्ति की शुरूआत की.

एक स्थानीय निवासी कहते हैं, हर घर में पानी और टेलीफ़ोन है. भ्रष्टाचार के आरोप सारे गलत हैं. राजनीति में लोग आगे बढ़ते हैं, तो लोग षडयंत्र करते हैं.

जबकि एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि आदिवासी क्षेत्रों में जैसे लाहौल, स्फीति, जहां लैन्डलाइन भी अच्छे ढंग से काम नहीं करती थीं, आज वहां लोगों के पास मोबाईल फ़ोन हैं.

भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद सुखराम ने हिमाचल विकास कांग्रेस की स्थापना की. वो लोगों के पास गए और खुद को बेकसूर बताया.हालांकि ये पार्टी भी जल्द ही बिखर गई.

उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा सालों से सुखराम की राजनीति को देख रहे हैं.

वे कहते हैं कि मंडी की राजनीति में पंडित सुखराम को एक पिटा हुआ पहलवान समझते हैं. वे कहते हैं कि मंडी के लोगों के सुखराम के कारनामों के बारे में पता है, पर चूंकि मंडी के लोगों के लिए सुखराम ने कुछ काम किये हैं, वे उनके कामों के लिए उनके ऋणी हैं.

सुखराम खुद को बेकसूर बताते हैं, और अपनी स्थिति के लिए मीडिया को काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार ठहराते हैं.

जब हमने उनसे पूछा कि वे खुद भ्रष्टाचार के मुद्दे को किस तरह से देखते हैं, यानि कितना महत्वपूर्ण है ये मुद्दा उनके लिए, थोडा ठहरने के बाद वे बोले कि जब उन पर से भ्रष्टाचार के मुद्दे हट जाएंगे, तब वो इस पर बात करेंगे, अभी वे चुप रहेंगे.

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