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गाड़ी से कुचलकर बाघ की मौत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मंगलवार को उत्तर प्रदेश के बहराइच ज़िले में सड़क दुर्घटना में घायल हुए एक बाघ की मौत हो गई है. लखनऊ चिड़ियाघर के अधिकारी डॉक्टर उत्कर्ष शुक्ला ने बताया कि दुर्घटना में बाघ को गंभीर अंदरूनी घाव हो गए थे. ग़ौरतलब है कि दर्द से तड़पते हुए इस बाघ को 36 घंटे के बाद लखनऊ के चिड़ियाघर में इलाज के लिए लाया गया था. कतरनीघाट रिजर्व फ़ॉरेस्ट के नैनिहा जंगल में घूमते हुए इस बाघ को किसी वाहन ने टक्कर मार दी थी जिससे बाघ गंभीर रूप से घायल होकर चलने-फिरने में असमर्थ हो गया. ग्रामीणों ने बिना किसी भय के इस बाघ की तस्वीरें उतारी और बाद में जंगल के अधिकारियों को सूचित किया. अधिकारियों के मुताबिक तीन मीटर लंबे इस बाघ की उम्र 10 वर्ष थी. हालांकि देश में बाघों की संख्या में तेज़ी से कमी आई है लेकिन कतरनीघाट रिज़र्व फॉरेस्ट में बाघ, तेंदुआ और अन्य जंगली जानवर काफ़ी संख्या में मौजूद हैं. उल्लेखनीय है कि वृक्षों की कटाई और गन्ने की खेती के कारण इस जंगल का दायरा सिमट रहा है. रेल की पटरी और रोड के जंगल से गुज़रने के कारण जानवरों के दुर्घटनाग्रस्त होने की भी आशंका बनी रहती है. स्थानीय पत्रकार बच्चे भारती का कहना है कि वन्य विभाग के पास जंगली जानवरों की देख-रेख करने के लिए न तो पर्याप्त साज़ो सामान हैं न ही कर्मचारी. उत्तर प्रदेश राज्य मे जंगली जानवरों को बेहोश करने वाले एक ही सरकारी वेटेनरी डॉक्टर हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें बाघ की खाल की तस्करी, 16 गिरफ़्तार05 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस वनराज की खाल का बढ़ता बाज़ार27 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'बाघों के शिकार पर कोर्ट की हिदायत'26 मई, 2007 | भारत और पड़ोस लगातार घट रही है बाघों की संख्या24 मई, 2007 | भारत और पड़ोस बाघों की चौकसी करेंगे पूर्व सैनिक03 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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