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मंगलवार, 27 नवंबर, 2007 को 09:11 GMT तक के समाचार
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किरण बेदी का सेवानिवृति का आवेदन

किरण बेदी
किरण बेदी तिहाड़ जेल में अपने सुधार कामों के लिए जानी जाती हैं
भारतीय पुलिस सेवा की पहली महिला अधिकारी किरण बेदी ने पुलिस की नौकरी छोड़ने का निश्चय किया है. उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृति के लिए गृह मंत्रालय को आवेदन दिया है.
सरकार की तरफ़ से अभी कोई जवाब किरण बेदी को नहीं दिया गया है.

वर्ष 1972 में भारतीय पुलिस सेवा में आईं किरण बेदी तिहाड़ जेल में सुधार कामों के लिए जानी जाती हैं. वे मैगसासे पुरस्कार भी जीत चुकी हैं.

किरण बेदी ने बीबीसी को बताया, "मुझे कोई नाराज़गी नहीं है. ये एक व्यक्तिगत फ़ैसला है ताकि मैं अपनी अकादमिक, आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यों को बेहतर ढंग से कर सकूँ. अपनी चुनौतियों का दायरा बढ़ा सकूँ."

उनसे पूछा गया कि क्या पुलिस सेवा में उन्हें चुनौतियाँ का सामना करने का मौक़ा नहीं मिल रहा था?

उनका कहना था, "जहाँ मैं पुलिस में काम कर रही थी वहाँ नीतियाँ बनाने का काम था उन्हें लागू करने का नहीं. बात समय की थी - मैं अपने समय को बेहतर ढंग से किस तरह इस्तेमाल कर सकूँ."

उनका कहना था कि भारतीय पुलिस सेवा के बारे उन्हें यही कहना है - 'बहुत-बहुत धन्यवाद. मुझे काम करने का इतना बड़ा मौक़ा मिला.'

उनका कहना था कि पुलिस सेवा से संबंधित बातें अब पीछे छूट गई हैं और अब वे अपनी अन्य रूचियों पर ध्यान देंगी.

उन्होंने बताया, "अब मैं वक़्त निकाल पाऊँगी समाजसेवा के लिए. ग्रामीण कार्यक्रम हैं, पंचायत प्रशिक्षण कार्यक्रम हैं, क़ैदियों की पढ़ाई का कार्यक्रम है और विशेष तौर पर गुड़गाँव में पर्यावरण से संबंधित काम है."

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 अब मैं वक़्त निकाल पाऊँगी समाजसेवा के लिए. ग्रामीण कार्यक्रम हैं, पंचायत प्रशिक्षण कार्यक्रम हैं, क़ैदियों की पढ़ाई का कार्यक्रम है और विशेष तौर पर गुड़गाँव में पर्यावरण से संबंधित काम है
किरण बेदी

मुझे कोई नाराज़गी नहीं है. ये एक व्यक्तिगत फ़ैसला है ताकि मैं अपनी अकादमिक, आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यों को कार्यों को बेहतर ढंग से कर सकूँ. अपनी चुनौतियों का दायरा बढ़ा सकूँ.

उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष जुलाई में उनसे जूनियर अधिकारी को दिल्ली का पुलिस आयुक्त बनाए जाने पर सार्वजनिक रूप से उन्होंने अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की थी.

तब उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा था, "ये बहुत ग़लत प्रथा की शुरुआत हुई है और इससे व्यवस्था में कई ख़ामियां भी सामने आईं. शायद पहले भी ऐसा होता रहा होगा लेकिन लोगों के पास आवाज़ नहीं रही होगी. पहली बार प्रणाली की व्यवस्था की सबके सामने आ गई."

किरण बेदी ने भारत में सावर्जनिक क्षेत्रों में महिलाओं की कम उपस्थिति और उनकी भूमिका की अनदेखी किए जाने के बारे में भी सवाल खड़े किए थे.

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