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शुक्रवार, 23 नवंबर, 2007 को 17:19 GMT तक के समाचार
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बंगाल में 'धारा 356' लगाना हल नहीं
शिवराज पाटिल
धारा 356 का इस्तेमाल बहुत सावधानी से होना चाहिए
गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में हिंसा के विषय पर आज राज्यसभा में चर्चा में कहा कि इस हिंसा से निपटने के लिए राज्य में धारा 356 लागू कर राष्ट्रपति शासन लगाना कोई हल नहीं है.

उन्होंने कहा कि धारा 356 का इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों में और बहुत आवश्यक होने पर तब किया जाता है जब आर्थिक और राजनीतिक ढ़ांचा चरमरा जाए और कानून और व्यवस्था का शासन नहीं हो.

उन्होंने पश्चिम बंगाल में धारा 356 लगाने की विपक्ष की मांग पर कहा कि पहले भी कई राज्यों में हिंसा की घटनाएं हुई हैं और उस समय विपक्ष सत्ता में था लेकिन वहाँ पर इस धारा का इस्तेमाल नहीं किया गया.

पाटिल ने कहा कि संविधान के रचयिताओं ने भी कहा था कि धारा 355 और 356 का इस्तेमाल विशेष स्थितियों में ही किया जाना चाहिए. इस संबंध में भीमराव अंबेडकर ने कहा था कि वे उम्मीद करते हैं कि ऐसी स्थिति नहीं आयेगी कि इन धाराओं का इस्तेमाल करना पड़े. लेकिन अगर ऐसी स्थिति आती है तो इन धाराओं को बहुत सावधानी से लागू किया जाना चाहिए.

हिंसा के ज़िम्मेदार

भारतीय जनता पार्टी यानी भाजपा की सदस्य सुषमा स्वराज के प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि नंदीग्राम की हिंसा में नक्सली, माओवादी या कोई अन्य गुट शामिल हो सकता है और इस बारे में उनके पास कुछ जानकारी है लेकिन उस जानकारी को सदन में बताना सुरक्षा बलों के हित में नहीं होगा.

 निर्दोष लोगों को गोली मार कर राज करना हिंदुस्तान में नहीं चलेगा
शिवराज पाटिल

सुषमा ने गृह मंत्री से सवाल किया कि क्या वो नंदीग्राम में बंदूक का मुकाबला करने के तरीके को सही मानते हैं? पाटिल ने इस पर जवाब दिया, “यह निर्णय करना न्यायालय का काम है और वो इस बारे में निर्णय नहीं कर सकते.”

पाटिल ने कहा, “निर्दोष लोगों को गोली मार कर राज करना हिंदुस्तान में नहीं चलेगा.”

उन्होंने कहा कि नक्सली या किसी अन्य हिंसा का हल गोली मारना नहीं बल्कि सुधार करना है. केवल आलोचना करने से इसका हल नहीं निकलेगा.

पाटिल ने कहा, “हिंसा करने वालों और हमारे बीच काफी फर्क है. हम लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं, वो नहीं. हम कानून के शासन में विश्वास रखते हैं, वो बंदूक में.”

गृह मंत्री ने कहा हिंसा का मुकाबला सिर्फ बंदूक से नहीं बल्कि बातचीत से, आर्थिक न्याय से और समग्र रवैये के साथ किया जायेगा.

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