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गुरुवार, 22 नवंबर, 2007 को 16:04 GMT तक के समाचार
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राज्यसभा में नंदीग्राम हिंसा की आलोचना
भारतीय संसद
संसद के मौजूदा सत्र के दौरान नंदीग्राम हिंसा का मुद्दा प्रमुखता से छाया हुआ है
नंदीग्राम के मुद्दे पर राज्यसभा में गुरूवार को हुई बहस के दौरान भाजपा और सीपीएम के बीच तीखी नोंकझोंक के बीच लगभग सभी राजनीतिक दलों ने वहां हुई हिंसा की निंदा की.

राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे पर ओछी सियासत से ऊपर उठकर राष्ट्रीय सहमति बनाने की बात पर आम राय व्यक्त की.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता सुषमा स्वराज ने सदन में चर्चा की शुरूआत करते हुए पश्चिम बंगाल के हालात को बेकाबू बताते हुए वहां राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की.

उन्होंने नंदीग्राम में विशेष आर्थिक क्षेत्र ( एसईज़ेड) की स्थापना को लेकर उपजी हिंसा और बलात्कार की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि वहां संविधान के अनुच्छेद 355 की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.

उन्होंने कहा कि यदि अनुच्छेद 355 के तहत स्थित काबू में नहीं आती तो वहां राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए.

इस मुद्दे पर बुधवार को लोकसभा में चर्चा के दौरान केद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने कहा था कि राज्य सरकार को हिंसा रोकने के लिए अनुच्छेद 355 के तहत लिखित निर्देश दिए गए हैं.

सुषमा स्वराज ने नंदीग्राम में पुलिस फ़ायरिंग में 14 लोगों के मारे जाने तथा महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाओं को निंदनीय बताते हुए सभापति की ओर से एक निंदा प्रस्ताव लाने की मांग की.

माओवादी चिंता

हिंसा की घटनाओं के पीछे माओवादियों का हाथ बताए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि राज्य के गृह सचिव ने खुद कहा है कि वहां माओवादियों की मौजूदगी नहीं है.

उन्होंने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी( सीपीएम) नेता सीताराम येचुरी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ नेपाल में वे जब माओवादियों के साथ बात करते हैं और वहीं राज्य में उन्हें हिंसा का ज़िम्मेदार भी ठहराते हैं.

इस पर सीपीएम नेता ने कहा कि नेपाल में माओवादियों की तुलना भारत में माओवादियों से नहीं की जानी चाहिए. उन्होंने दलील दी कि स्वयं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने नंदीग्राम में माओवादियों के होने की पुष्टि की थी.

उन्होंने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की भाजपा की मांग को सरकार को अस्थिर करने वाला बताते हुए कहा कि सीआरपीएफ अगर ठीक समय पर पहुंच जाती तो हिंसा इतनी नहीं बढ़ती.

कांग्रेस नेता और संसदीय मामलों के मंत्री प्रियरंजन दास मुंशी ने कहा कि हालांकि नुकसान की क्षतिपूर्ति नहीं की जा सकती लेकिन सरकार विशेष आर्थिक क्षेत्रों के लिए भूमि अधिग्रहण कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव लाएगी.

समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह ने बहस में हिस्सा लेते हुए नंदीग्राम हिंसा को सिर्फ़ पश्चिम बंगाल की समस्या नहीं बताते हुए देशव्यापी चिंता करार दिया.

भाजपा के एसएस अहलूवालिया ने नंदीग्राम की तुलना जलियांवाला बाग कांड से की.उन्होंने फ़ौरन राज्य में एक सर्वदलीय शिष्टमंडल भेजे जाने की मांग की.

इसके अलावा कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी, सीपीआई की वृंदा करात सहित कई नेताओं ने बहस में हिस्सा लिया.

इस सबके बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में पश्चिम बंगाल सरकार ने नंदीग्राम हिंसा की जांच के लिए दस सदस्यीय सीआईडी का दल भेजने का फ़ैसला किया है, जो जांच करके अपनी रिपोर्ट सरकार को सौपेगा.

पुलिस की सीआईडी शाखा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक भूपिंदर सिंह ने पीटीआई को बताया कि ये टीम दस नवंबर के बाद नंदीग्राम में मौत के चार और बलात्कार के तीन मामलों की जांच करेगा.

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