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पंडितों ने पूजा कर विश्व रिकॉर्ड बनाया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान मे जयपुर के निकट 3700 से ज्यादा पंडितों ने एक साथ भूमि पूजन करके नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है. इस मौके पर गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की किम लैसी भी मौजूद थी. पंडितों का विश्वास है कि पूजित भूमि पर अब मकान बनाना शुभ होगा. पंडितों ने भूमि की पूजा के लिए फावडे़ का भी इस्तेमाल किया था जिसकी वजह से यह रिकॉर्ड बना, यह भूमि पूजन का नहीं बल्कि एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के फावड़े चलाने का रिकॉर्ड है. इससे पहले अमरीका में वर्ष 2003 में 2453 लोगों ने एक साथ फावड़ा उठाया था जो एक विश्व रिकार्ड था. यहाँ पूजा के लिए पंजीकरण कराने वाले पंडितों की संख्या 3760 थी. उन्होंने कहा, “इस कार्यक्रम को देखना बहुत ही रोमांचित करने वाला था. कार्यक्रम को धार्मिक महत्व का बताया गया था लेकिन इससे आयोजोकों को व्यापारिक लाभ भी मिलेगा.” व्यावसायिक परियोजना वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन का आयोजन किया गया और एक विशाल प्रांगण में 3700 से ज्यादा पंडितों ने धरती की पूजा की. इस अनुष्ठान का आयोजन एक निजी कंपनी ने किया था जो इस भूमि पर 3500 से ज्यादा मकान बनाकर बेचना चाहती है. पूजा के लिए देश भर से पंडित बुलाये गए थे. आयोजन से जुड़े पंडित दीनानाथ पांडे ने बताया की इसमे 82 पंडित बंगलौर से, 120 देश के विभिन्न भागों से और बाकि पंडित जयपुर से आए थे. पंडितों ने भूमि की पूजा के लिए फावडे़ का भी इस्तेमाल किया था. कार्यक्रम के आयोजक विभिषेक सिंह ने बताया, “पहले सभी 3510 मकानों के लिए इतने ही पंडित बुलाकर पूजा करवाना तय किया था. लेकिन पंडितों की संख्या बढ़ गई.” अनुष्ठान करवा रहे पंडित चंद्रशेखर ने कहा कि जितने ज्यादा पंडित होते हैं पूजा का महत्व भी उतना ही अधिक होता है. पूजा मे भाग लेने जोधपुर से आए पंडित दिनेश श्रीमाली कहते हैं कि ये धरती माता को प्रसन्न करने का कार्यक्रम था. यहाँ 3510 मकान बनेंगे और उनमे रहने वाले लोगों को संतोष होगा कि पूजा कर धरती माता को खुश किया जा चुका है. | इससे जुड़ी ख़बरें रामसेतु: आस्था बनाम विकास09 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस पाकिस्तानी हिंदू:अस्तित्व की चिंता-121 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस पिघल रहा है अमरनाथ का शिवलिंग30 जून, 2007 | भारत और पड़ोस 'मंदिर हैं सिर्फ़ हिंदुओं के लिए'08 जून, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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