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झारखंड सरकार का संकट गहराया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड में कॉंग्रेस की सरकार से समर्थन वापल लेने की धमकी के बाद मधु कोड़ा के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. यह धमकी ऐसे समय पर आई है जब झारखंड राज्य के गठन के सात साल पूरे हुए हैं. सात वर्ष पूर्व 15 नवंबर को बिहार के दक्षिणी हिस्से को अलग कर झारखंड राज्य का गठन किया गया था. मगर सात वर्षों बाद भी राज्य में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. और तो और, सात सालों में सरकार का न अपना कार्यालय है न ही अपनी विधान सभा. दोनों ही किराए पर लिए गए भवन से संचालित हो रहे हैं. उन्नीस सूत्रीय मांगें बृहस्पतिवार को कॉंग्रेस कार्यकारी समिति के सदस्य तथा पार्टी के झारखंड मामलों के प्रभारी अजय माकन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने मधु कोड़ा से मुलाकात की और 19 सूत्री मांगों वाला एक प्रतिवेदन उन्हें थमा दिया. कॉंग्रेस का कहना है की झारखंड में अराजकता की स्थिति है और भ्रष्टाचार का बोलबाला है जिसकी वजह से राज्य में विकास नहीं हो पा रहा है. बीबीसी से बातचीत के दौरान अजय माकन का कहना था कि झारखंड सरकार की हालत बहुत ख़राब है और अराजकता के इस माहौल में अगर उनकी पार्टी सरकार को समर्थन जारी रखती है तो उससे कॉंग्रेस की छवि ख़राब हो जाएगी. उन्होंने कहा, "पूरी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए हमने मुख्य मंत्री को छह महीने की मोहलत दी है. अगर उस दौरान व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई तो हमारे पास समर्थन वापस लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं है." अजय माकन के नेतृत्व में कॉंग्रेस के नेताओं नें झारखंड के राज्यपाल सैयद सिब्ते रज़ी से भी मुलाक़ात की. कॉंग्रेस के बाग़ी तेवर के कारण ही राजधानी के मोराहबादी मैदान में आयोजित झारखंड का स्थापना दिवस समारोह काफ़ी विलंब से शुरू हो पाया जिसमें कॉंग्रेस के नेता नदारद रहे.
कॉंग्रेस की धमकी के कारण मधु कोडा की सरकार के सामने संकट पैदा हो गया है क्योंकि कॉंग्रेस के पास नौ विधायक हैं जो सरकार को समर्थन दे रहे हैं. इसके अलावा राष्ट्रीय जनता दल के सात , झारखंड मुक्ति मोर्चा के 17, यूजीडीपी के दो , तीन निर्दलीय और आल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन, झारखंड पार्टी, राष्ट्रवादी कॉंग्रेस पार्टी और फ़ॉरवर्ड ब्लॉक के एक एक विधायक के समर्थन से मधु कोड़ा की सरकार चल रही है. राष्ट्रपति शासन ही विकल्प अगर कॉंग्रेस समर्थन वापस ले लेती है तो सरकार गिर जाएगी और झारखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने का ही एक मात्र विकल्प बच जाएगा क्योंकि 30 सदस्यों वाली भारतीय जनता पार्टी अपने छह विधायकों की बग़ावत के कारण सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है. कॉंग्रेस द्वारा मुख्य मंत्री को दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य में क़ानून व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. पार्टी ने मांग की है कि सरकार को क़ानून व्यवस्था सुधारने और नक्सली हिंसा रोकने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना लागू करनी होगी. ज्ञापन में कहा गया है की जहाँ वर्ष 2006 में नक्सली हिंसा में 93 नागरिक मारे गए थे वहीं इस वर्ष अब तक 145 लोगों की जानें जा चुकी हैं . साथ ही जहाँ वर्ष 2006 में 228 नक्सली वारदातें हुईं थीं वहीं इस वर्ष अक्टूबर तक 292 वारदातें हो चुकी हैं . | इससे जुड़ी ख़बरें विकास सबसे बड़ी चुनौतीःकोड़ा15 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस क्या हैं झारखंड के लोगों के सरोकार?27 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'बहुराष्ट्रीय कंपनियों से करार खत्म हो'23 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस झारखंड में 'गुरुजी' की पकड़ मज़बूत22 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस झारखंड में चरम पर नक्सलवाद27 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस मुठभेड़ में तीन माओवादी मारे गए28 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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