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गुरुवार, 20 सितंबर, 2007 को 17:03 GMT तक के समाचार
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'निजी एफ़एम से समाचार पर विचार'
पॉवर एफ़एम
अभी निजी रेडियो मुख्यत: बॉलीवुड और संगीत के कार्यक्रम प्रसारित करते हैं
भारत में सरकार ने कहा है कि निजी रेडियो स्टेशनों को समाचारों का प्रसारण करने की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है.

हालाँकि अनुमति देने से पहले सरकार रेडियो प्रसारणों पर निगरानी रखने की व्यवस्था तैयार करेगी.

उल्लेखनीय है कि भारत में बड़ी संख्या में प्राइवेट एफ़एम रेडियो स्टेशन सक्रिय हैं, लेकिन सिर्फ़ आकाशवाणी के एफ़एम स्टेशनों से ही समाचार प्रसारित होते हैं.

 हमें सीधे तौर पर एफ़एम रेडियो पर समाचारों और सामयिक विषयों के प्रसारण पर ऐतराज़ नहीं है, लेकिन हम इस पर निगरानी रखने के लिए विभिन्न तरीक़ों को ढूँढ रहे हैं.
प्रियरंजन दासमुंशी

सूचना और प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने कहा, “हमें सीधे तौर पर एफ़एम रेडियो पर समाचारों और सामयिक विषयों के प्रसारण पर ऐतराज़ नहीं है, लेकिन हम इस पर निगरानी रखने के लिए विभिन्न तरीक़ों को ढूँढ रहे हैं.”

उन्होंने कहा, "हम इस पर विचार कर रहे हैं, और हमने इस विषय पर राज्य सरकारों की राय माँगी है."

टालू रवैये पर असंतोष

जब से भारत में निजी एफ़एम रेडियो शुरू हुए हैं तभी से इस तरह की बातें सुनी जा रही हैं कि सरकार निजी स्टेशनों को समाचार और सामयिक विषयों के प्रसारण की अनुमति दे सकती हैं. लेकिन सरकार इस मामले में बातों से आगे कुछ ठोस क़दम उठाने में हमेशा से टालमटोल करती रही हैं.

 जब प्राइवेट टीवी चैनल सारे समाचार कवर करते हैं, और अगर सरकार को उन पर विश्वास है तो फिर रेडियो पर भी उन्हें भरोसा करना चाहिए.
प्रशांत पांडेय, मिर्ची रेडियो

रेडियो मिर्ची के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि सरकार को बिना देरी किए प्राइवेट रेडियो स्टेशनों को समाचार प्रसारित करने का अधिकार देना चाहिए.

उन्होंने कहा, "इसमें देरी का कोई कारण नहीं है. जब प्राइवेट टीवी चैनल सारे समाचार कवर करते हैं, और अगर सरकार को उन पर विश्वास है तो फिर रेडियो पर भी उन्हें भरोसा करना चाहिए."

पांडेय ने कहा कि रेडियो स्टेशन चलाने वाली कंपनियों ने सरकार को 'वन टाइम एंट्री फ़ी' की अग्रिम अदायगी कर रखी है, और यदि कोई स्टेशन बार-बार ग़लती करता है तो सरकार के पास उसका लाइसेंस रद्द करने का विकल्प है.

प्राइवेट रेडियो प्रसारणों की निगरानी की बात पर उन्होंने कहा, "कोई सरकारी निगरानी की आवश्यकता नहीं है क्योंकि ज़्यादातर रेडियो प्रसारक विश्वसनीय मीडिया कंपनियों से जुड़े हैं."

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