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'परमाणु मामले पर संसदीय समिति नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत-अमरीका परमाणु सहमति पर संयुक्त संसदीय समिति के गठन की विपक्ष की माँग पर संसद के दोनो सदनों में भारी हंगामा हुआ है और उनकी कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी है. संयुक्त जनतांत्रिक गठबंधन (यूपीए) सरकार की ओर से लोकसभा में बोलते हुए विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा, "वाम दलों के साथ हमारी बातचीत यूपीए का अदरूनी मामला है. मैं भारत-अमरीका परमाणु मुद्दे पर संयुक्त संसदीय समिति के गठन से साफ़ इनकार करता हूँ." उनका कहना था कि 26 जनवरी 1950 के बाद से दो देशों के बीच संपन्न हुई सहमति को पहले कभी सदन में संसदीय समिति को नहीं सौंपा गया. जैसे ही प्रणव मुखर्जी ने संसदीय समिति गठित किए जाने से इनकार किया, वैसे ही भाजपा सहित विपक्षी दलों ने हंगामा शुरु कर दिया. विपक्ष का कहना था कि यह सहमति यूपीए का आंतरिक मामला न होकर पूरे देश से संबंधित मुद्दा है. राज्यसभा में भी परमाणु सहमति पर शोर-शराबा हुआ और सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी. इससे पहले गुरुवार को भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर वाम दलों की आपत्तियों पर विचार के लिए सरकार ने एक समिति गठित करने का फ़ैसला किया था. विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने वामपंथी दलों और यूपीए के नेताओं के बीच बैठक के बाद कहा कि ये समिति अमरीकी हाइड एक्ट के भारत-अमरीका समझौते पर पड़ने वाले प्रभावों और द्विपक्षीय संबंधों का आकलन करेगी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'समझौता कायम पर चिंता दूर करेंगे'19 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस राजदूत को लेकर संसद में फिर हंगामा22 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस 'परमाणु समझौते पर आगे बढ़ेगा भारत'22 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस वामपंथियों की रणनीति और यूपीए सरकार23 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु मुद्दे पर माकपा नरम हुई25 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस मुख्यधारा और वामपंथियों के सरोकार25 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस 'गतिरोध दूर करने के लिए समिति बनेगी'27 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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