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'डिग्री न मिलने से डॉक्टर हड़ताल पर' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन का कहना है कि डिग्रियाँ न मिलने के कारण लगभग 700 रेज़ीडेंट डॉक्टर मंगलवार की शाम से हड़ताल पर हैं. हड़ताल से आपातकालीन सेवाएँ प्रभावित नहीं हैं जबकि ओपीडी और वार्ड सेवाएँ इससे प्रभावित होंगी. दरअसल आयुर्विज्ञान संस्थान की डिग्री पर रजिस्ट्रार, डीन, निदेशक और अध्यक्ष चार लोगों के हस्ताक्षर होते हैं. इन सबके हस्ताक्षर होने पर ही एमबीबीएस और अन्य डिग्रियाँ मिलती हैं. आयुर्विज्ञान संस्थान का अध्यक्ष केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री होता है इसलिए अंबुमणि रामदॉस इसके अध्यक्ष हैं. रेज़ीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर हर्षवर्धन का कहना कि पिछले दो वर्षों से स्वास्थ्य मंत्री के दस्तख़त न होने के कारण डिग्रियाँ नहीं मिल पा रही हैं. डॉक्टर हर्षवर्धन के अनुसार वे स्वास्थ्य मंत्री से भी मिल चुके हैं लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ. डिग्री न मिलने के कारण कई डॉक्टर किसी अन्य जगह नौकरी भी हासिल नहीं कर पा रहे हैं. उनका कहना था कि हड़ताल से मरीजों को दिक्कत होगी लेकिन इसके सिवाय कोई विकल्प नहीं है. उधर एम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉक्टर शक्ति गुप्ता का कहना था कि हड़ताल की अस्पताल प्रशासन को आधिकारिक सूचना नहीं मिली है और बुधवार को स्थिति की समीक्षा की जाएगी. उन्होंने माना कि डिग्रियों पर स्वास्थ्य मंत्री के हस्ताक्षर होते हैं और उसमें कुछ देर हुई हो सकती है. | इससे जुड़ी ख़बरें एम्स के डॉक्टर भूख हड़ताल पर15 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस इलाज करने वाले ख़ुद ही बीमार हैं03 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस डॉक्टर वेणुगोपाल की बर्ख़ास्तगी पर रोक07 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस एम्स के डॉक्टरों की हड़ताल ख़त्म07 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस हड़ताल से बुरी तरह प्रभावित एम्स07 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस स्वायत्तता बनाम राजनीतिक दखलंदाज़ी06 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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