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राह पकड़ तू एक चला चल पा जाएगा मधुशाला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में पहले ग़ैर-मुस्लिम और सरकार का अनुमति-पत्र रखने वाले ही शराब पी सकते थे लेकिन अब मुसलमान बेहिचक शराब ख़रीद और पी रहे हैं. पाकिस्तानी संविधान के अनुसार देश में केवल ग़ैर-मुस्लिम ही शराब पी सकते हैं लेकिन आजकल कराची में तो शराब पीने वालों में अधिकतर मुसलमान हैं. देश में शराब पर अब नाममात्र का ही प्रतिबंध रह गया है. राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ की उदारवादी नीति से पाकिस्तान में शराब पीने वालों की संख्या में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है और इन्हीं के कार्यकाल में एक और शराब बनाने वाली कंपनी 'आवारी ब्रुअरीज़' को शराब बनाने और बेचने की अनुमति दी गई है. पाकिस्तान संविधान के अनुसार देश में खुलेआम शराब पीने और बेचने पर प्रतिबंध है. शराब पीने का परमिट ऐसे ग़ैर-मुस्लिम व्यक्ति को दिया जाता है जिसकी आय कम से कम 1500 रूपए मासिक हो. इतनी आय होने पर एक यूनिट शराब का परमिट दिया जाता है जिससे वह व्यक्ति हर महीने बियर की बीस बोतलें या व्हिस्की या वोदका की एक बोतल ख़रीद सकता है. बिक्री कराची में एक शराब की एक दुकान के मालिक सेठ अमर लाल ने बीबीसी को बताया कि मुशर्रफ़ सरकार से पहले काफ़ी कठोर नियम थे और जब कोई शराब ख़रीदने आता था तो हम सरकारी अनुमति-पत्र देखकर ही शराब देते थे. उन्होंने बताया, “अब जो भी शराब ख़रीदने आता है हम उसको शराब बेच देते हैं. चाहे वो मुसलमान, हिंदू या ईसाई कोई भी हो.” सेठ अमर लाल का कहना था, “अब तो सरकारी नीति में बहुत बदलाव आया है और अब पुलिस भी तंग नहीं करती.” उन्होंने कहा कि नवाज़ शरीफ़ और बेनज़ीर भुट्टो की सरकार के दौरान हमारी बिक्री सीमित थी और ज़िया-उल-हक़ के कार्यकाल में तो कारोबार बिल्कुल बंद पड़ा था. अमर लाल ने बताया, “आजकल काम अच्छा चल रहा है और शराब की भी ख़ूब बिक्री हो रही है.” अमर लाल ने बताया कि 1977 में ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो ने शराब पीने और बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन ग़ैर-मुसलमानों को शराब पीने और बेचने की अनुमति थी.
उनका कहना था, “उस समय सरकार ने ग़ैर-मुसलमानों को पूरे देश में 60 दुकानों के लिए लाइसेंस जारी किए थे.” उन्होंने कहा कि आज केवल कराची में 45 लोगों के पास शराब की दुकानों के लाइसेंस हैं जो पूरे शहर में शराब बेच रहे हैं. उन्होंने बताया कि सभी लाइसेंसधारी दुकानों पर देसी शराब बिकती है जो रावलपिंडी, कराची और क्वेटा में तैयार होती है. सेठ अमर लाल का कहना था कि विदेशी शराब तो सिर्फ़ बड़े होटलों में ही मिल पाती है. परमिट रूम उन्होंने बताया, “बड़े होटलों में तो एक परमिट रूम होता है जहाँ शराब पी जाती है जिसका लाइसेंस सरकार जारी करती है.” राज्य के कर विभाग के एक अधिकारी वाहिद मेमन ने बीबीसी को बताया कि सिंध सरकार ने कराची में 55 शराब की दुकानों के लाइसेंस जारी किए हैं और तीन बड़े होटलों को परमिट रूम के लिए लाइसेंस दिए गए हैं. एक शराब की दुकान पर वोदका और बियर की दो बोतलें ख़रीदने के बाद 37 साल के कैसर महमूद ने कहा कि पाकिस्तान में शराब पीना अब इतनी बड़ी समस्या नहीं है. उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में शराब पर प्रतिबंध केवल पन्नों पर ही सीमित है और अब मुसलमान बिना किसी डर के शराब पीते हैं.” कैसर ने बताया कि वो सप्ताह में एक बार शराब पीते हैं. मुकेश कुमार ने बताया कि मेरे पास सरकारी परमिट है लेकिन अब दुकान वाले इसकी मांग नहीं करते. उनका कहना था, “आठ-नौ साल पहले जब मैं शराब ख़रीदता था तब शराब की दुकान वाले अनुमति-पत्र या पहचान-पत्र की मांग करते थे. उसे दिखाने के बाद ही शराब मिलती थी.” मुकेश का कहना था कि पाकिस्तान में ग़ैर-मुसलमानों को शराब पीने का अधिकार है लेकिन मुसलमानों पर प्रतिबंध है फिर भी वह शराब पीते हैं. उनका कहना था, “पाकिस्तान एक इस्लामी देश है. यहाँ शराब पर प्रतिबंध लगना चाहिए.” प्रतिबंध कराची के जाने माने वकील सलाहुद्दीन गंडापुर ने बताया कि पाकिस्तान में पहली बार शराब पीने और बेचने पर प्रतिबंध 1977 में ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो के कार्यकाल में लगाया गया और एक विशेष कोटा के तहत ग़ैर-मुसलमानों को शराब बेचने और पीने की अनुमति दी गई.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दंड संहिता(पीपीसी) में 1979 तक शराब पीना और बेचना एक अपराध था और ऐसा करने वालों को तीन महीने की सज़ा और पाँच सौ रूपए का आर्थिक दंड होता था. उनका कहना था, “ज़िया-उल-हक़ ने अध्यादेश जारी कर शराब पीने की सज़ा पाँच साल कर दी.” सलाहुद्दीन ने कहा कि आजकल शराब पर प्रतिबंध केवल पीपीसी के पन्नों तक ही रह गया है और अब पुलिस भी कोई मामला दर्ज़ नहीं कर रही. उन्होंने बताया, “मुशर्रफ़ सरकार की वजह से शराब की दुकानें अब बंद गलियों से निकल कर बड़ी सड़कों पर आ गई हैं.” मुशर्रफ़ सरकार से पहले हर शासक के कार्यकाल में शराब पीने पर प्रतिबंध लगा था. (वाईन शॉप के मालिक के अनुरोध पर उनका नाम बदल दिया गया है.) | इससे जुड़ी ख़बरें 'टाइगर वाइन' पर चीन की आलोचना18 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस जेसिका मामले में मनु शर्मा को उम्र क़ैद20 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस शराब के विज्ञापन से फँसे मोहनलाल15 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस कर्नाटक में देसी शराब पर प्रतिबंध लगा16 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस विषैली शराब पिलाने पर मिलेगी उम्र क़ैद03 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस 'जारी रहेगी औरतों के शराब परोसने पर रोक' 23 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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