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उत्तराखंड में बारिश का क़हर जारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तराखंड में भारी बारिश से नौ लोगों की मौत हो गई है. पौड़ी के यमकेश्वर ब्लॉक में बादल फटने से 4 लोग बह गए और चमोली के गोपेश्वर इलाके में भूस्खलन में 5 लोगों के दबने का समाचार है. इससे बरसात की वजह से मरनेवालों का आंकड़ा 35 तक पहुँच गई है और करोड़ों की संपत्ति का नुक़सान हुआ है. पिछले दो हफ्तों से गढ़वाल मंडल और अलमोड़ा व पिथौरागढ़ इलाक़े में लगातार हो रही विनाशकारी बारिश के सामने लोग लोग बेबस औऱ लाचार नज़र आ रहे हैं. किसी का मकान धंस गया है, कहीं दुकानों में पानी भरा है, कहीं सड़कें टूटने से लोग अलग-थलग पड़े हुए हैं तो कहीं बादल फटने और नदियों के उफनने से लोगों की जान पर बन आई है. पहाड़ों में आवागमन का एकमात्र साधन सड़क यातायात पूरी तरह से चरमरा गया है. लोग ख़तरा मोल लेकर वैकल्पिक कच्चे रास्तों से आना-जाना कर रहे हैं. सरकार ने स्थिति से निबटने के लिए श्रीनगर और अलमोड़ा में दो आपदा प्रबंधन केंद्र बनाए हैं और पीएसी तैनात कर दी गई है. इंतज़ाम को लेकर असंतोष लेकिन लोगों की शिकायत है कि प्रशासनिक बंदोबस्त नाकाफ़ी हैं. टिहरी के चंबा इलाके में यात्रा प्रबंधक भगत सिह सजवाण कहते हैं,'' तीर्थयात्रियों की गाड़ियां रास्तों में फंसी हुई हैं, कहा जाता है कि एक- दो घंटे में रास्ता खुल जाएगा लेकिन कोई इंतज़ाम नहीं किया जा रहा है और यात्री पानी तक के लिए तरस रहे हैं.'' धनोल्टी में रहनेवाले लोकेश शर्मा कहते हैं, '' हर ओर तबाही है और प्रशासन सो रहा है. आपदा प्रबंधन के बड़े-बड़े दावे किये जाते हैं लेकिन उसकी कलई खुल गई है.'' दिल्ली बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर पीपलकोटी के पास करीब आधा किमी सड़क बह गई है और हेमकुंड और बद्रीनाथ जानेवाले सैकड़ों यात्री और वाहन फंसे हुए हैं. टिहरी बांध की झील का जलस्तर 795 मीटर पहुँच गया है और स्थानीय पुलों और सड़कों के उसमें डूब जाने से करीब 10 हज़ार आबादी का सड़क संपर्क कट गया है. हालांकि हरिद्वार में हालात में कुछ सुधार हुआ है. पटरियों के डूबने से पिछले दो दिनों से ठप्प रेल यातायात दोबारा बहाल कर दिया गया है. मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष रिकॉर्ड बारिश हुई है. देहरादून पर ही नजर डालें तो अगस्त के पूरे महीने में 715 मिमी औसत बारिश होती थी लेकिन शुरू के 15 दिनों में ही 950 मिमी बारिश हो चुकी है. मौसम विभाग के निदेशक डॉक्टर आनंद शर्मा के मुताबिक़," शुक्रवार के बाद शायद कुछ राहत मिलने की संभावना है क्योंकि दबाव कमजोर पड़ रहा है. हालांकि पहाड़ों में भूस्खलन का खतरे की आशंका बनी रहेगी." | इससे जुड़ी ख़बरें यमुनोत्री ग्लेशियर टूटा, स्थिति नियंत्रित13 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस अलकनंदा नदी में बनी झील टूटी, अलर्ट01 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस पर्यटन को उद्योग बनाने का अधूरा सपना20 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस बाराती बस खाई में गिरी, 14 मरे12 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस उत्तरांचल में ट्रक दुर्घटना, 48 मारे गए13 जून, 2006 | भारत और पड़ोस गंगा-यमुना में पानी का संकट22 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस उत्तरांचल में बस दुर्घटना, 22 की मौत03 मई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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