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अफ़ग़ान चरमपंथियों की कड़ी आलोचना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र ने आरोप लगाया है कि अफ़ग़ानिस्तान में चरमपंथी आम नागरिकों की ज़िंदगी की परवाह नहीं कर रहे और सामूहिक हत्याएँ कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र की ओर से ये बयान एक तालेबान आत्मघाती हमलावर के देश के दक्षिणी भाग में 17 लोगों को मार देने के एक दिन बाद आया है. अफ़ग़ानिस्तान के गृह मंत्रालय का कहना है कि मृतकों में 12 स्कूली बच्चे थे. संयुक्त राष्ट्र दूत ने की आलोचना ये हमला देश के दक्षिण में स्थित उरुज़गान प्रांत के देहरावुद कस्बे के एक बाज़ार में हुआ. नैटो के नेतृत्व वाली अंतरराष्ट्रीय सेना के एक काफ़िले के पास हुए विस्फोट में आठ सैनिक घायल हो गए. काबुल में संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष प्रतिनिधि टॉन कोइनिग्स ने निर्दोष लोगों की जान की परवाह न करने के इस रवैए की कड़ी आलोचना की है. उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनों का बुरी तरह उल्लंघन हुआ है और इस तरह की 'सामूहिक हत्या' का कोई स्पष्टीकरण नहीं हो सकता. हाल में अफ़ग़ानिस्तान की सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षाबलों के हवाई हमलों में आम नागरिकों की मौत पर कड़ी आपत्ति जताई थी. संयुक्त राष्ट्र महासचिव के विशेष प्रतिनिधि टॉन कोइनिग्स का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र मिशन ने बार-बार ज़ोर दिया है कि सभी पक्षों को ध्यान रखना चाहिए कि आम नागरिक हताहत न हों. पिछले डेढ़ साल में अफ़ग़ानिस्तान में विद्रोह के कारण चल रही हिंसा में लगभग 1800 लोग मारे गए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें बम हमलों में 35 अफ़ग़ान मारे गए06 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस काबुल में सामूहिक क़ब्र मिली05 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस विस्फोट में नैटो के छह सैनिक मरे04 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस नैटो की बमबारी में 'नागरिक' मारे गए30 जून, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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