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करुणानिधि के विधानसभा में 50 साल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की तारीफ़ करते हुए कहा है कि वे देश की राजनीति के महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक हैं. करुणानिधि के राज्य विधानसभा में पचास साल पूरे किए जाने के अवसर पर आयोजित एक रैली में मनमोहन सिंह ने कहा कि करुणानिधि की सेवाएँ महत्वपूर्ण हैं. उल्लेखनीय है कि अस्सी वर्ष से अधिक के हो चुके करुणानिधि को राजनीति में आए 70 वर्ष से भी अधिक समय हो चुका है और वे विधानसभा में पचास साल पूरा कर चुके हैं. चेन्नई में आयोजित इस रैली में केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन और उनके भाई कलानिधि मारन शामिल नहीं हुए. यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गाँधी सहित कई बड़े नेताओं की उपस्थिति में प्रधानमंत्री ने कहा कि करुणानिधि का नाम तमिलनाडु और देश के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा. उन्होंने कहा कि करुणानिधि ने तमिलनाडु के सामाजिक और शैक्षिक विकास और महिलाओं के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. मारन का विवाद केंद्रीय मंत्री दयानिधि मारन प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए हवाईअड्डे तो गए लेकिन वे करुणानिधि की रैली में शामिल नहीं हुए. दरअसल मारन परिवार के अख़बार और टेलीविज़न चैनल के दफ़्तर में हुई तोड़फोड़ के बाद वे करुणानिधि के प्रति नाराज़गी जता चुके हैं और सीबीआई जाँच के आदेश के बावजूद उनकी नाराज़गी दूर नहीं हुई है. ग़ौरतलब है कि करुणानिधि की असहमति के बावजूद मारन के अख़बार में एक सर्वेक्षण प्रकाशित कर दिया था जिसमें उनके छोटे बेटे स्टालिन को उनका राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया गया था और इससे करुणानिधि के बड़े बेटे अझागिरी नाराज़ हो गए थे. | इससे जुड़ी ख़बरें करुणानिधि पाँचवी बार मुख्यमंत्री बने13 मई, 2006 | भारत और पड़ोस करुणानिधि बनाएँगे अल्पमत सरकार12 मई, 2006 | भारत और पड़ोस करुणानिधि की वापसी का रास्ता साफ़11 मई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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