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राजस्थान में कबूतर भगाएंगे बाज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान में सरकार पर्यटन महत्व की इमारतों से कबूतरों का बसेरा हटाने के लिए बाज़ पक्षी की मदद लेने पर विचार कर रही है. जयपुर के अल्बर्ट हॉल संग्रहालय से कबूतरों को भगाने के लिए एक बाज़ पक्षी के हुनर का प्रदर्शन किया गया जिसे देखने वालों में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी शामिल थी. यह प्रदर्शन देखने के बाद देखकर मुख्यमंत्री राजे ने कहा, ‘‘जैसे कुछ समय पहले दिल्ली में सरकारी भवनों से बंदरों को नियंत्रित करने के लिए लंगूर काम में लाए गए थे. उसी तरह यहाँ बाज़ पक्षी को इस्तेमाल करने पर सोचा जा रहा है. क्योंकि हमें बताया गया है कि कबूतर इमारतों की भव्यता को बदरंग कर रहे हैं.’’ जयपुर के शाहिद ख़ान को बाज़ पालने या बाज़गरी की कला विरासत में मिली है. ख़ान अधिकारियों के समक्ष अपना प्रिय पक्षी बाज़ लेकर आए थे. उनका कहना था कि बाज़ को यहाँ दो-तीन उड़ान कराने से कबूतर ठिकाना बदल सकते हैं.
वो कहते हैं ' बाज़ कबूतरों का शिकार नहीं करेगा. लेकिन हड़का कर भगा सकता है. मैं शिकार के विरुद्ध हैं और मानव वन्य जीव वार्डेन भी.' अधिकारियों का कहना है कि कबूतरों की बहुतायत से राज्य के सबसे पुराने संग्रहालय में रखी बेशक़ीमती सामग्री और इमारत की भव्यता ख़राब हो रही है. इस संग्रहालय में राजस्थान की कला संस्कृति से जुड़ी सामग्री देखने प्रतिदिन एक हज़ार से ज़्यादा सैलानी आते हैं. लेकिन अधिकारियों का कहना है कि वे कबूतरों के जमावड़े से परेशान हैं. सरकार के इस प्रस्ताव पर वन्य जीव प्रेमी ख़ुश नहीं हैं. सेवानिवृत वन अधिकारी वी एस सक्सेना कहते हैं, ‘‘बाज़ पक्षी वन्य जीव क़ानून की अनुसूची ए में संकटास्पद प्राणियों में शामिल है. इसके ऐसे प्रयोग से क़ानून का उल्लंघन होगा. वैसे भी बाज़ एक दुर्लभ पक्षी है. सरकार का यह कदम ठीक नहीं है.’’ राजस्थान में 80 के दशक में पाकिस्तान सीमा से लगते मरुस्थल में अरब के शेख बाज़ परिदों का करतब और शिकार देखने आए तो ख़ासा बवाल मच गया था. तब से सरकार इन परिदों की सुरक्षा और संख्या पर ज़्यादा सावधानी बरतती है. बहरहाल सरकार ने इस प्रयोग को हरी झंडी दे दी तो कबूतरों को नया बसेरा ढूंढना पड़ सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें कश्मीर लौटने लगे हैं 'विदेशी मेहमान'14 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस किसका है आसमान? | भारत और पड़ोस चिड़ीमार से पक्षी विशेषज्ञ का सफ़र12 मार्च, 2004 | भारत और पड़ोस पक्षी विहार में नदारद हैं परिंदे06 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस लखनऊ में दुर्लभ पक्षी पकड़े गए02 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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